गणेश मंदिर पर चोरों ने बोला धावा, दान पेटी तोड़ नकदी राशि लेकर हुए फरार

गणेश मंदिर पर चोरों ने बोला धावा, दान पेटी तोड़ नकदी राशि लेकर हुए फरार

देवास।अमिताभ शुक्ला।
देवास में चोरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों शहर में अलकापुरी स्थित जैन मेंदिर में चोरों ने भगवान का छत्र चोरी कर लिया था। उसके बाद फिर बीती देर रात को गणेश मंदिर में अज्ञात चोरों ने मंदिर की दान पेटी पर हाथ साफ कर दिया। इससे पहले कृष्ण मंदिर में चोरों ने महिला के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया था। कहा जाए तो शहर में चोरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिलहाल मामले को लेकर औद्योगिक थाना पुलिस मौका स्थल पर पहुंच गई थी। जहां जांच कर जा रही थी की किस तरह चोरों ने मंदिर की दान पेटी से नगद चुराया और फरार हो गए।

शहर में चोरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन शहर में चोरी की वारदातें हो रही है। पिछले ही दिनों अलकापुरी स्थित जैन मंदिर में चोरों ने भगवान का छत्र चुराया था और फरार हो गए थे। वहीं उससे पहले कृष्ण भगवान के मंदिर में महिला के साथ लूट हो गई थी। दोनों ही मामलों को लेकर पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज मिले थे, लेकिन चोरों का अब तक कोई पता नहीं चला है। बीती देर रात को नागदा स्थित गणेश मंदिर में चोरों ने दान पेटी में रखी नगदी चुराई और फरार हो गए। बताया गया है की दान पेटी कई दिनों से खुली नहीं थी। इसलिए कहा जा सकता है की दान पेटी में नगदी राशि अधिक हो सकती है। बताया गया है की चोरों ने दान पेटी का एक तरफ से ताला तोड़ा और जितनी बड़ी राशि निकल सकती हो उतनी निकालकर फरार हो गए। इस मामले को लेकर जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस घटना स्थल का मुआयना कर रही थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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