धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। आज से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हो रही है, जिसे इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इस सुनवाई को लेकर सिर्फ धार ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में उत्सुकता बढ़ गई है। लोगों की नजरें अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि भोजशाला का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

एएसआई रिपोर्ट पर टिकी है पूरी बहस

भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है। वर्ष 2024 में कोर्ट के आदेश पर एएसआई की टीम ने 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था। यह सर्वे साधारण नहीं था। इसमें आधुनिक तकनीक, ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) और सीमित खुदाई का इस्तेमाल किया गया था, जिससे कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य जुटाए गए। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रखेंगे।

98 दिन की जांच से मिले अहम सबूत

एएसआई की टीम ने करीब तीन महीने तक लगातार भोजशाला परिसर की जांच की। इस दौरान कई कलाकृतियां, संरचनाएं और शिलालेख सामने आए, जिन्हें रिपोर्ट में शामिल किया गया है। यह साक्ष्य इस मामले में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। कानून विशेषज्ञ भी मानते हैं कि एएसआई की रिपोर्ट इस केस में निर्णायक भूमिका निभा सकती है और कोर्ट के फैसले को प्रभावित कर सकती है।

प्रदेश में बढ़ी हलचल, प्रशासन अलर्ट

भोजशाला का मामला लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे में जैसे ही सुनवाई की तारीख तय हुई, प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। धार जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है।

क्यों अहम है यह सुनवाई

यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक के सभी सबूत और रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखे जाएंगे। इसके बाद ही आगे की दिशा तय होगी। इस फैसले का असर सिर्फ एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि हर कोई इस सुनवाई पर नजर बनाए हुए है।