कोरोना संकट काल के बीच सामने आई बीएमओ की बड़ी लापरवाही

कोरोना संकट काल के बीच सामने आई बीएमओ की बड़ी लापरवाही

धार। मोहम्मद अंसार ।
इस संकट के समय दीनदयाल योजना का चलित वाहन की बड़ी लापरवाही सामने आई। बीएमओ
द्वारा वाहन चेकिंग गाड़ी में बैठ कर मरीजों की लिस्ट बनाई जा रही थी।। जहां एक और पूरा विश्व कोरोना जेसी महामारी से लड़ रहा है .परंतु मध्य प्रदेश सरकार दीनदयाल चलित योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपए खर्च कर रही है.. इस योजना के अंतर्गत गांव गांव जाकर मरीजों को उपचार किया जाना होता है.. परंतु दीनदयाल चलित योजना के अंतर्गत काम कर रहे हैं कर्मचारियों के इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई की गाड़ी में बैठ कर मरीजों के लिस्ट बना रहे थे ..कुक्षी बीएमओ डॉ पवैया किसी काम से निकल रहे थे रास्ते में जब दीनदयाल चलित वाहन खड़ा हुआ दिखा ..तो उन्होंने चेकिंग किया तो चेकिंग में जिस गांव में गए नहीं उस गांव के 30 से 40 मरीजों की एंट्री रजिस्टर में बैठे-बैठे एंट्री कर दिए।कि हमने तलवाड़ा गांव में कुछ गर्भवती महिला और कुछ मरीजों को चेकअप करके उनके टेस्ट करके उनको दवाई गोलियां वितरण करके आ गए है जबकि बीएमओ उसी गांव से दौरा करके आ रहे थे ..जब उनकी चोरी पकड़ी गई तो दीनदयाल चलित वाहन के कर्मचारी के हक्के बक्के छूट गए. दीनदयाल चलित योजना ठेकेदारों के द्वारा संचालित होती हैं और हर महीने करोड़ों का बिल मध्यप्रदेश शासन को दिया जाता है लेकिन धरातल पर मनुष्य के साथ में खिलवाड़ किया जा रहा है ।जो आज कुक्षी के बीएमओ ने साबित कर दिखाया.. फिलहाल दीनदयाल चलित वाहन कर्मचारी के खिलाफ और ठेकेदार के खिलाफ जांच शुरू कर दी है ..जाच के बाद की जाएगी कार्रवाई ..इस तरीके से पूरे मध्यप्रदेश में दीनदयाल चलित योजना का कर्मचारियों के द्वारा दुरुपयोग किया जाता होगा

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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