श्रीकांत सर की क्लास में ठहाकों के बीच बच्चों ने सीखे सफल कॅरियर के गुर

श्रीकांत सर की क्लास में ठहाकों के बीच बच्चों ने सीखे सफल कॅरियर के गुर

धार।

कलेक्टर श्रीकांत बनोठ ने कोई सवा घण्टे तक स्थानीय पीजी कॉलेज में बच्चों से प्रेरणा संवाद किया। श्रीकांत सर की इस क्लास में बच्चों ने कॅरियर संवारने के गुर सीखे। ठहाकों के बीच दिये गये टिप्स को आत्मसात किया। इस दौरान थ्रीइडियट फिल्म के साथ ही कुपोषण ,खेलकूद और गंभीरता से पढ़ाई करने के संबंध में विस्तार से बातचीत की। बच्चों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के भी जवाब कलेक्टर ने दिये। काफी हल्के फुल्के अंदाज में कलेक्टर ने बच्चों को समझाया कि इस उम्र में भी अपनी रूची समझ इसमें कॅरियर बनाने पर जुट जाए।

सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता केवल कड़ी मेहनत से ही इसे हासिल किया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा कि हार्डवर्क के साथ स्र्माटवर्क भी जरूरी है। यह भी कोई जरूरी नहीं कि दिन रात पढ़ाई की जाए। केवल यह ख्याल रहे कि जब भी पढ़े पूरा ध्यान लगाकर पढ़े। टाईम मेनेजमेंट करें। जिस विषय में कमजोर हो, उस पर सबसे ज्यादा मेहनत करे, पूछने में संकोच न करें, ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता। पढे़ हुऐ विषयों का नोट्स जरूर बनाए। अपना सर्कल अच्छा रखें गु्रप डिस्कषन करें ।

प्रतियोगी परीक्षा में लाखो की संख्या में प्रतियोगी भाग लेते है। यूपीएससी परीक्षा में लगभग 10 लाख प्रतिभागी शामिल होते है। चयन केवल एक हजार का होता है। अगर यूपीएससी में किसी प्रतिभागी के चयन की संभावना देखे तो यह .01 प्रतिषत है। कलेक्टर हंसते हुए बोले कि कोई व्यक्ति 15 वी मंजिल से कूदे तो भी बचने का प्रतिषत इससे अधिक होता है। उन्होने कहा कि प्रष्नों के उत्तर में जवाब की गुणवत्ता का सर्वाधिक महत्व है। जो भी पढ़े आनसर राईटिग की पे्रक्टीस जरूर करें। अभी समय का सदुपयोग कर ले बाद में तो सभी तरह के मनोरंजन के लिये समय रहेगा। ध्यान दें दुनिया में क्या चल रहा है, केवल किताब से ही ज्ञान नहीं बढ़ सकता।

आप लोगो को यह सोचना होगा कि वर्तमान तकनीक में हर तरह के बैरियर समाप्त कर दिए है। जरूरी नहीं है कि गांव के विद्यार्थी को कोचिंग के लिए बाहर जाना पडे। नेट के माध्यम से अच्छे से अच्छा स्टडी मटेरियल हासिल किया जा सकता है। बशर्ते टिकटाॅक में समय जाया नही किया जाए। स्वयं के आईएएस में चयन पर कलेक्टर बोले मैं भी शुरू में संषय में रहा कैसे पढूं किताना पढंू कोर्स बहुत ज्यादा है। लेकिन रणनिति बनाकर लगातार तैयारी ने मुझे सफलता दिलाई।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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