पश्चिमी मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में इन दिनों आदिवासी संस्कृति के महापर्व भगोरिया की धूम मची हुई है। इसी कड़ी में धार जिले के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू में आयोजित भगोरिया मेले में लोक-संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी मेहमान भी मांदल की थाप पर खुद को थिरकने से नहीं रोक सके।
नगर पंचायत परिषद द्वारा आयोजित इस भव्य मेले में एक मंच भी लगाया गया था, जहां से मांदल दलों और दूर-दराज से आए पर्यटकों का स्वागत किया जा रहा था। इस दौरान मेले में पहुंचीं केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने न केवल विदेशी पर्यटकों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया, बल्कि वह खुद भी ढोल और मांदल की धुन पर जमकर नाचती हुई दिखाई दीं।
विदेशी मेहमान भी हुए आदिवासी रंग में सराबोर
मांडू के भगोरिया की खासियत यह रही कि इसमें विदेशी पर्यटकों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ विदेशी सैलानी भी मांदल की पारंपरिक धुनों पर थिरकते नजर आए। यह नजारा भारत की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की वैश्विक अपील को दर्शाता है। पर्यटकों ने इस अनुभव को अविस्मरणीय बताया।
फसल और उल्लास का पर्व है भगोरिया
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मेले में मौजूद रहे। उन्होंने भगोरिया पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आदिवासियों के लिए सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि फसल कटाई के बाद खुशियां मनाने और विवाह संबंधों की शुरुआत का प्रतीक है।
“मुझे गर्व है कि मेरा जन्म आदिवासी समुदाय में हुआ। भगोरिया पर्व आदिवासी फसल काटने के बाद ब्याह-शादी की खुशियों के साथ मनाया जाता है।” — उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
भगोरिया मेले के दौरान मांडू का ऐतिहासिक परिसर पारंपरिक परिधानों, लोक संगीत और नृत्य से जीवंत हो उठा। यह आयोजन न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
धार से मो.अन्सार की रिपोर्ट






