भोजशाला में उत्सव का माहौल, सुबह से मां सरस्वती की पूजा के लिए लगी लाइनें, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इंदौर हाई कोर्ट ने ASI की 98 दिनों की वैज्ञानिक रिपोर्ट को मान्य किया जिसके अनुसार भोजशाला में हिंदू मंदिर के अवशेष मौजूद थे।  
Long queues for the worship of Goddess Saraswati at Bhojshala

Long queues for the worship of Goddess Saraswati at Bhojshala

भोजशाला को मां वाग्देवी यानि मां सरस्वती का मंदिर घोषित किये जाने के बाद से हिन्दू समाज में ख़ुशी की लहर है, भोजशाला के लिए दशकों से संघर्ष करने वाली समिति के लोग इसे सनातन और सत्य की जीत कह रहे हैं वहीं सनातन में आस्था रखने वाले लोग हाई कोर्ट द्वारा हिंदू मंदिर घोषित होने और हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलने को मां सरस्वती का आशीर्वाद मान रहे हैं और पूजा अर्चना करने भोजशाला पहुंच रहे हैं

धार में आज शनिवार की सुबह रोज की सुबह से अलग थी, कल शुक्रवार को इंदौर हाई कोर्ट से आये एक फैसले ने वर्षों से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया, हाई कोर्ट ने भोजशाला विवाद मामले में फैसला देते हुए इसे हिंदू मंदिर और मां सरस्वती की पाठशाला घोषित कर दिया और हिंदू पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए हिंदुओं को पूजा का अधिकार दे दिया और एएसआई का पिछला आदेश जिसमें नमाज़ अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। कोर्ट ने ASI की 98 दिनों की वैज्ञानिक रिपोर्ट को मान्य किया जिसके अनुसार भोजशाला में हिंदू मंदिर के अवशेष मौजूद थे।

 उत्सव का माहौल, कल शाम लोगों ने दीपक जलाये  

इस फैसले के आने के बाद धार में भोजशाला के बाहर लोग इकट्ठा हो गए ढोल नगाड़ों की ख़ुशी मनाई डांस किया और लोगों को गुलाल लगाकर गले मिलकर बधाई दी , शाम को अपन अपने घरों पर दीपक जलाये और कहा हमारे लिए आज का दिन दिवाली के दिन से कम नहीं है, अज आज जब सुबह हुई तो उसकी रौनक अलग थी।

पूजा के लिए सुबह से भोजशाला में पहुंच रहे भक्त 

भोजशाला के बाहर हिंदू भक्तों की लम्बी लम्बी कतारें लग गई लोग बे रोक टोक, बेझिझक पूजा करने पहुंचे, उन्होंने मां वाग्देवी( मां सरस्वती) की प्रतिमा वाले स्थान पर पुष्प माला चढ़ाई, बैठक रभजन कीर्तन हनुमान चालीसा का पाठ किया और मां सरस्वती से आशीर्वाद लिया, भोज उत्सव समिति के लोगों ने इस जीत को उन कार्यकर्ताओं को समर्पित किया जिन्होंने दशकों तक संघर्ष किया , यातनाएं झेलीं और अपने प्राणों की आहुति तक दी। माहौल एकदम शांत है फिर भी प्रशासन ने यहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं, करीब 1500 जवान भोजशाला के बाहर और अन्दर तैनात किये गए हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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