
मो.अंसार/धार। आदिवासियों को लेकर मध्यप्रदेश में राजनीति गर्मा गई है। आरएसएस जिस तरह जनगणना में आदिवासियों को हिंदू धर्म अंतर्गत बताने का अभियान चलाने वाली है, उसपर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो चुका है। इस मामले पर कांग्रेस विधायक एवं जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ के पक्ष में सामने आ गए हैं।
उन्होने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह देश के संविधान को मानते ही नहीं है। भारत के संविधान में आदिवासियों का मुद्दा किसी धर्म के साथ नहीं जुड़ा है। आदिवासियों की एक अलग संस्कृति और पहचान है और मुख्यमंत्री कमलनाथ जानते हैं कि आदिवासियों के लिये क्या अधिकार और प्रावधान है तथा वे आदिवासियों के कल्याण के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma
निदेशक और संपादक
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →

