सोशल डिस्टेंस का पालन कर हुआ विवाह, डंडे से पहनाई वरमाला, डंडे से ही भरी मांग

सोशल डिस्टेंस का पालन कर हुआ विवाह, डंडे से पहनाई वरमाला, डंडे से ही भरी मांग

धार/राजेश डाबी

लॉकडाउन (lockdown) के चलते देशभर में कई चीजे स्थगित हो रही है जिनमें कई लोगों की शादी (marriage) भी है। सोशल डिस्टेंस (social distance) और अन्य नियमों के कारण लोग पहले से तय विवाह कार्यक्रम आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन धार में इसी लॉकडाउन के दौरान एक शादी हुई जहां सारे नियमों का पालन भी किया गया।

धरमपुरी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अमूल राठौड़ एवं शिक्षिका कीर्ति राठौड़ सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए परिणय सूत्र में बंध गए । शादी के लिए दूल्हा मात्र तीन लोगों की बारात लेकर पहुंचा, वही वधु पक्ष की ओर से भी चार लोग ही सादगी से हुई इस शादी (marriage) के गवाह बने। बता दें की शिक्षिका कीर्ति राठौड़ का रिश्ता खरगोन जिले के सेगावा निवासी अमूल राठौड़ के साथ तय हुआ था, विवाह के लिए 4 मई की तारीख तय की गई थी और दोनों पक्षों की ओर से विवाह को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते विवाह करना मुश्किल लग रहा था। इसे देखते हुए दोनों पक्षों ने कोरोना (corona) महामारी में सादगी से विवाह करने का फैसला लिया। लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए इन्होने प्लास्टिक की 1 फिट लंबे डंडे का प्रयोग कर एक दूसरे को वरमाला पहनाई, वही फेरे लेने के दौरान इस डंडे से ही दूल्हे ने दुल्हन की मांग भरी गई व मास्क लगाकर विवाह की रस्में पूरी की। दूल्हे अमूल राठौड़ ने बताया कि शादी को लेकर प्रशासन से परमिशन ली गई थी और सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार ही सभी रस्मों को निभाया गया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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