न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने, पीएफ जमा नहीं होने सहित कई परेशानियाँ झेल रहे सिनकॉम फार्मूलेशन पीथमपुर के श्रमिक धरने पर

महिला श्रमिक ने मीडिया को बताया कि 225 रुपये प्रतिदिन मिलते है। ओवर टाइम करने पर दो घंटे के 50 रुपये मिलते हैं। सीएल वगैरह कुछ नहीं मिलता है। एक और महिला श्रमिक ने कहा कि घर से लेट हो जाते है तो नाश्ता भी नहीं करने देते है, 10 बजे पानी पीने के लिए आते है तो पानी भी नहीं पीने देते है।
Syncom Formulations Pithampur Workers on strike

Syncom Formulations Pithampur Workers on strike

धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर के सेक्टर एक स्थित दवा निर्माता कंपनी सिनकाम फार्मूलेशन के सैकड़ों मजदूर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कंपनी के बाहर धरने पर बैठ गए है। दरअसल श्रमिकों ने प्रबंधन पर न्यूनतम मजदूरी न देने, भविष्य निधि (पीएफ) जमा न करने और महिला श्रमिकों के शोषण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

मजदूरों का आरोप है कि कंपनी उन्हें मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के विपरीत बेहद कम मजदूरी दे रही है। उनसे आठ घंटे की पूरी ड्यूटी ली जाती है, लेकिन बदले में केवल 210 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। श्रमिकों ने इसे श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। वही श्रमिक अधिकारी ने कहा की न्यूनतम वेतन के कम मिलता है कि तो निश्चित रूप से जो वैधानिक कार्यवाही है वह हम करेंगे।

महिला श्रमिकों ने मीडिया से कही अपनी पीड़ा 

महिला श्रमिक पिंकी ने मीडिया को बताया कि 225 रुपये प्रतिदिन मिलते है। ओवर टाइम करने पर दो घंटे के 50 रुपये मिलते हैं। सीएल वगैरह कुछ नहीं मिलता है। एक और महिला श्रमिक अंजली ने कहा कि घर से लेट हो जाते है तो नाश्ता भी नहीं करने देते है, 10 बजे पानी पीने के लिए आते है तो पानी भी नहीं पीने देते है। 10-5 मिनट होने पर भी बोल देते है कि आप जाओ। लंच में भी फिक्स टाईप पर छोडते है और फिर जल्दी जल्दी करके भेज देते है। हमारा पेमेंट बहुत कम है बढ़ना चाहिए।

श्रम अधिकारी ने श्रमिकों को दी समझाइश 

मजदूरों की हड़ताल की सूचना पर फैक्ट्री पहुंचे पीथमपुर के श्रम अधिकारी दशरथ सुंगधी ने मीडिया को बताया कि सूचना मिली थी कि प्रथम पाली में आने वाले श्रमिकों ने मैनेजमेंट के सामने यह बात रखी हमको नियमानुसार सरकारी सुविधा न्यूनतम वेतन , पीएफ, आईसी की जो सुविधा है वह मिलना चाहिए। इसलिए वह सब बैठ गए थे। हम लोग आए और समाधान का प्रयास किया। कुछ श्रमिकों ने चर्चा में बताया कि ये सब ठेकेदार के श्रमिक है, कंपनी के प्रबंधक के श्रमिक नहीं है। इस स्थिति में मैनेजमेंट से भी इस प्रकार की जानकारी जुटाएंगे कि ठेकेदार श्रम अधिनियम के तहत दायित्व है कि ठेकेदार उन्हें न्यूनतम वेतन का भुगतान करें और उस भुगतान को वह विधिक रूप से सुनिश्चित कराए। न्यूनतम वेतन के कम मिलता है कि तो निश्चित रूप से जो वैधानिक कार्यवाही है वह हम करेंगे।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews