पुलिस अधिकारी बनने से पहले अच्छा इंसान बनें पुलिस अधीक्षक

पुलिस अधिकारी बनने से पहले अच्छा इंसान बनें पुलिस अधीक्षक

डिंडौरी ।प्रकाश मिश्रा।

पुलिस अधीक्षक एम एल सोलंकी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवकुमार सिंह के मार्गदर्शन में दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन पुलिस कंट्रोल रूम में किया गया।सेमिनार का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के प्रति पुलिस की जिम्मेदारी ,व्यवहार, तथा कार्रवाई सुनिश्चित करने में संवेदन शील होकर न्याय दिलाने के लिए हमेशा तत्पर रहना था। जिला स्तरीय सेमिनार में जिले के लगभग 50 पुलिस कर्मचारी एवं अधिकारी सम्मिलित हुए।

सेमिनार के समापन पर उपस्थित पुलिस कर्मचारी एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक एम एल सोलंकी ने कहा कि पुलिस अधिकारी बनने से पहले अच्छा इंसान बनें। फरियाद चाहे कोई भी हो पुलिस का व्यवहार सब के लिए मधुर और संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियां आज से नहीं सनातन काल से चली आ रही है हमारा उद्देश्य समाज के उन शोषित,वंचित एवं कमजोर वर्गों को कुरीतियों से बचाते हुए उनका अधिकार न्याय पूर्वक दिलाना है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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