खौफनाक: बड़े भाई ने छोटे को उतारा मौत के घाट, पत्नी और मां ने साजिश में दिया साथ

खौफनाक: बड़े भाई ने छोटे को उतारा मौत के घाट, पत्नी और मां ने साजिश में दिया साथ

डिंडोरी। प्रकाश मिश्रा।

मामूली से पारिवारिक विवाद ने एक युवक की जान ले ली ।जान से खिलवाड़ करने वाला कोई और नहीं बल्कि मृतक का बड़ा भाई ही निकला ।घटना 3 जनवरी सोमवार के रात लगभग 9:00 बजे की है जहां मृतक गोडू बेगा पिता स्वर्गीय जेठू बेगा उम्र लगभग 24 वर्ष निवासी शांति नगर वार्ड नंबर 10 अपने काम से वापस घर लौटा ।घर में मृतक का बड़ा भाई भल्लू पहले से ही मौजूद था ।मामूली सी बात को लेकर मृतक और आरोपी के बीच कहासुनी होने लगी जिसमें आरोपी के साथ उसकी पत्नी और मृतक की मां भी सम्मिलित रही ।

विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी ने घरेलू उपयोग में लाई जाने वाली धारदार चाकू से मृतक पर हमला कर दिया जिससे मृतक घायल हो गया और जमीन पर गिर गया। मृतक की हालत को देखकर विवाद कर रहे तीनों आरोपी मौके से भाग गए ।

परिवार के बीच हो रहे विवाद को पड़ोसियों ने देखा ।गौडू के सिर से बहते खून को देखकर 100 डायल को फोन किया गया जिसमें घायल को लेकर जिला अस्पताल लाया गया और इलाज के दौरान ही गौडू की मौत हो गई। घटनास्थल पर पड़ोस में रहने वाली महिला ने बताया कि पूरा परिवार शराब का नशा करता था और आए दिन उनके बीच विवाद होता रहता था । बताया जाता है कि मृतक गौंडू होटल में काम करता था और उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं घटना के बाद मृतक युवक का परिवार पूरी तरह से बेसहारा हो गया है।घटना की सूचना कोतवाली पुलिस को मिली कोतवाली पुलिस ने घटना के बाद भागे आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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