तहसीलदार ने ठेले-टपरों पर चलवाया बुल्डोजर, दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर गरीब

तहसीलदार ने ठेले-टपरों पर चलवाया बुल्डोजर, दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर गरीब

डिंडोरी।प्रकाश मिश्रा।
13 जनवरी को जिस प्रकार से बजाग तहसील में भू माफिया दमन दल के द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई उसमें गरीब व्यापारियों के चाय पान के ठेले व टीन के टपरों को बेरहमी से नेस्तनाबूद कर दिया गया। व्यापारियों ने प्रशासन के द्वारा किए गए आव्यवहारिक कार्रवाई का विरोध किया है ।व्यापारियों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए शहपुरा योजना आयोग की बैठक में पहुंचे मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तरुण भनोट को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई में हुए नुकसान की भरपाई तथा अनावश्यक रूप से उजाडे गए व्यापारियों को वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान कराए जाने की मांग की है ।व्यपारियों ने अपने ज्ञापन में प्रभारी मंत्री से कहा है कि भूमाफिया दमन दल ने वाहवाही लूटने के लिए गरीब व्यापारियों को उजाड़ दिया जिसके कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है ।छोटे-छोटे व्यापारी जो किसी तरह से अपना रोजगार चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं वह कब से भू माफिया हो गए ।भू-माफिया दमन दल गठित करने के पीछे मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य शासन की बड़ी-बड़ी भूमियों को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराना था ना कि सड़क किनारे पान ठेले टपरे लगाकर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले व्यापारियों को हटाना है ।जिले के अंतर्गत ऐसी दर्जनों एकड़ शासकीय भूमि है जिन पर अवैध तरीके से बड़े भू माफियाओं का कब्जा है जिसे प्रशासन नहीं देख पा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से इन छोटे छोटे व्यापारियों ने मांग करते हुए कहा है कि भूमाफिया दमन दल के द्वारा अनावश्यक रूप से छोटे-छोटे व्यापारियों को परेशान करना बंद किया जाए।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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