छूट के दौरान बाजारों में उमड़ी भीड़, सोशल डिस्टेंस का पालन कराने पुलिस सख्त

छूट के दौरान बाजारों में उमड़ी भीड़, सोशल डिस्टेंस का पालन कराने पुलिस सख्त

डिंडोरी/प्रकाश मिश्रा

कोरोना संक्रमण काल (corona) के लॉक डाउन 3 में मिली छूट का आम नागरिक बेजा फायदा उठा रहे हैं और अनावश्यक रूप से दोपहिया चार पहिया वाहनों में सवार लोग बाजार में पहुंचकर सोशल डिस्टेंस (social distance) की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करने जरूरी सामग्रियों की खरीद-फरोख्त करते समय सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील पुलिस प्रशासन के द्वारा आम नागरिकों से की जा रही है बावजूद इसके लोग ना सिर्फ मुख्य मार्ग पर भीड़ बढ़ा रहे हैं बल्कि नियमों को धता बताते हुए कोरोना संक्रमण को आमंत्रण दे रहे हैं।

बता दें कि डिंडोरी जिला (Dindori)ऑरेंज जोन (orange zone) में है, इन परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जिला कलेक्टर (collector) ने लॉक डाउन के दौरान सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जरूरी सामग्रियों के क्रय-विक्रय करने की छूट प्रदान की है। लेकिन देखा जा रहा है कि जिन संस्थाओं अथवा संस्थानों दुकानों को नियमनुसार छूट नहीं है वह भी इस दौरान दुकानें खोलकर व्यापार कर रहे हैं।

इस छूट के दौरान बाजार में उमड़ी भीड़ के द्वारा सोशल डिस्टेंस (social distance) का पालन न करने की शिकायत और अनावश्यक रूप से बाजार में घूमते दोपहिया चार पहिया वाहनों की शिकायत पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आई जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार सिंह एसडीओपी रवि प्रकाश कोतवाली प्रभारी सी के सिरामे यातायात प्रभारी राहुल तिवारी सहित पुलिस का अमला चौराहों पर मुस्तैदी से लग गया  इस दौरान कई दोपहिया और चार पहिया वाहनों के विरुद्ध चलानी कार्रवाई की गयी। सोशल डिस्टेंस का पालन कराने के लिए एक बार फिर पुलिस को सड़क पर उतर कर सख्ती दिखानी पड़ रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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