एमपी के इस स्कूल की अनूठी पहल, ‘बापू गैलरी’ से बच्चे जान रहे हैं गांधी का इतिहास

एमपी के इस स्कूल की अनूठी पहल, ‘बापू गैलरी’ से बच्चे जान रहे हैं गांधी का इतिहास

डिंडौरी।प्रकाश मिश्रा।

जिले में एक विद्यालय ऐसा भी है जहां स्वतंत्रता के महानायक महात्मा गांधी के बचपन से लेकर मृत्यु तक का चरित्र चित्रण विद्यालय की दीवारों में सचित्र गैलरी के रूप में लगाया गया है। बता दें कि जिले के डिंडोरी विकासखंड के अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला नरिया में शिक्षकों ने एक अनूठी पहल की है ।स्कूली बच्चों को गांधीजी के इतिहास को बताने के लिए सचित्र बापू की गैलरी को पोस्टरों के माध्यम से दीवारों में क्रमवार लगाया गया है ।बता दें कि यह वही विद्यालय है जो लगातार उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कई सम्मान प्राप्त कर चुका है। बापू की गैलरी में उनका बचपन शिक्षा-दीक्षा तथा देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए उनके प्रयासों को सचित्र चित्रण किया गया है। शिक्षकों की माने तो स्कूलों के पाठ्यक्रमों मैं तो पूज्य महात्मा गांधी के बारे में पढ़ाया ही जाता है किंतु इस बापू की गैलरी के माध्यम से स्कूल के बच्चे रोज उनका इतिहास देखते पढ़ते और दोहराते हैं जिससे बापू के विचारों को जानने और उनका अनुसरण करने की प्रेरणा बच्चों को मिल रही है ।स्कूली बच्चों को भी रुचि के साथ गैलरी में लगे इतिहास को पढ़ते हुए देखा जा सकता है। विद्यालय के बच्चों ने बताया कि गांधी जी की 150वीं जयंती के बाद यह प्रदर्शनी विद्यालय में लगाई गई है यहां सिर्फ स्कूल के बच्चे ही नहीं बल्कि अन्य विद्यालयों के बच्चे भी इसे देखने और पढ़ने के लिए आते हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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