नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें 4 फरवरी 2026 तक जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने भुगतान के वादों को बार-बार तोड़ने पर यादव के आचरण को ‘निंदनीय’ बताते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि अभिनेता को कई मौके दिए गए और उनके प्रति काफी उदारता भी दिखाई गई, लेकिन वे शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान करने के अपने आश्वासन को पूरा करने में लगातार विफल रहे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मैसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए एक वित्तीय विवाद से जुड़ा है। निचली अदालत ने इस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी को चेक बाउंस का दोषी ठहराते हुए छह-छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ यादव दंपति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
28 जून 2024 को उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने यह देखते हुए सजा पर रोक लगा दी थी कि वे आदतन अपराधी नहीं हैं और मामले को आपसी समझौते से सुलझाना चाहते हैं। इसके बाद मामले को मध्यस्थता के लिए भी भेजा गया था।
लगातार वादे तोड़ने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
जस्टिस शर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जून 2024 से लेकर अब तक राजपाल यादव लगातार भुगतान के लिए समय मांगते रहे, लेकिन हर बार अपने वादे से मुकर गए। उन्होंने अदालत को कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय-सीमा में यह राशि जमा नहीं कराई गई।
पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब याचिकाकर्ता खुद अपनी देनदारी स्वीकार कर चुका है, तो उसे बार-बार दी जा रही रियायत को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।” अदालत ने अभिनेता के व्यवहार को निंदनीय बताया।
4 फरवरी शाम 4 बजे तक का समय
अदालत ने निर्देश दिया कि यादव द्वारा पहले से जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को तुरंत जारी कर दी जाए। हालांकि, न्याय के हित में पीठ ने राजपाल यादव को 4 फरवरी 2026 की शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने की अनुमति दी, ताकि वे अपनी सजा पूरी कर सकें।
अभिनेता के वकील ने कोर्ट से समय देने का अनुरोध करते हुए बताया था कि राजपाल यादव फिलहाल मुंबई में अपने पेशेवर काम में व्यस्त हैं, जिसके बाद अदालत ने यह समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी, 2026 को होगी, जिसमें जेल अधीक्षक से अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।





