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धर्मेंद्र की रिजेक्ट की फिल्म ने बदली अमिताभ बच्चन की किस्मत, रातोंरात बने सुपरस्टार

Written by:Sanjucta Pandit
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फिल्मी करियर की शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर रही है, लेकिन इनकी फ़िल्में और हिट डायलॉग ने इन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। हालांकि, ऐसा 1973 के बाद हुआ जब उनकी झोली में एक फिल्म आई।
धर्मेंद्र की रिजेक्ट की फिल्म ने बदली अमिताभ बच्चन की किस्मत, रातोंरात बने सुपरस्टार

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अपनी एक अलग पहचान बन चुके हैं। आज 80 की उम्र पार करने के बाद भी वह एनर्जेटिक है। अभी भी वह लगातार फिल्मों व विज्ञापनों में काम भी कर रहे हैं। फिल्मी करियर की शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर रही है, लेकिन इनकी फ़िल्में और हिट डायलॉग ने इन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। हालांकि, ऐसा 1973 के बाद हुआ जब उनकी झोली में एक फिल्म आई, जिसने उनकी किस्मत बदल दी।

इससे पहले उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थी। लोग उनकी एक्टिंग को देखना पसंद नहीं करते थे। इसी बीच फिल्म इंडस्ट्री के ही मैन धर्मेंद्र ने कुछ फिल्में रिजेक्ट कर दी। जिनमें से एक अमिताभ बच्चन की झोली में आई। जिसने उन्हें रात-रात सुपरस्टार बना दिया।

जंजीर (Zanjeer)

दरअसल, इस फिल्म का नाम जंजीर है जो साल 1973 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में सबसे पहले मुमताज को फाइनल किया गया था, लेकिन अमिताभ बच्चन का नाम सुनते ही उन्होंने मूवी को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद धर्मेंद्र भी किसी कारण बस फिल्म को रिजेक्ट कर दिए, लेकिन इस फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए।

मिला यह टाइटल

इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन को एंग्री यंग मैन का टाइटल मिला था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अपोजिट में जया बच्चन नजर आई थी। इस फिल्म को करने से लगभग सभी सुपर स्टार मना कर चुके थे। वहीं, अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म से नई पहचान बनाई। इसके डायलॉग्स लोगों ने काफी ज्यादा पसंद किए थे। इसकी सफलता के बाद एक्टर हर मेर्क्स की पहली पसंद बन गए थे।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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