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बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक इच्छामृत्यु पर बनी है ये फिल्में, इनकी कहानी समाज को दिखाती है आईना

Written by:Diksha Bhanupriy
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इच्छा मृत्यु एक बहुत ही सेंसिटिव सामाजिक मुद्दा है। हरीश राणा के मामले के बाद ये काफी चर्चा में आ गया है। हालांकि बॉलीवुड और हॉलीवुड इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए कई फिल्में बना चुका है।
बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक इच्छामृत्यु पर बनी है ये फिल्में, इनकी कहानी समाज को दिखाती है आईना

गाजियाबाद के हरीश राणा का मामला इन दिनों काफी चर्चा में बना हुआ है। कुशल पहले वह एक हाथ से का शिकार हो गए थे और उसके बाद से कोमा में है। सालों से उनका इलाज चल रहा है लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसी को देखते हुए माता-पिता ने अपने बेटे की इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई थी जिसे 11 मार्च 2026 को इसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत दे दी है।

यह तो हरीश की असल जिंदगी की कहानी है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं की कई सामाजिक मुद्दों को दुनिया के सामने पेश करने वाले बॉलीवुड में भी इस मुद्दे पर कई फिल्में बन चुकी है। कई बार असल जिंदगी से जुड़े घटनाक्रम दिखाए जाते हैं और कई बार कहानी काल्पनिक होती है लेकिन टॉपिक समाज से जुड़े किसी मुद्दे का होता है। इच्छामृत्यु भी एक सेंसिटिव सब्जेक्ट है जिस पर कई फिल्में बनाई गई है। चलिए इस बारे में जानते हैं।

द सी इनसाइड

साल 2004 में यह हॉलीवुड फिल्म आई थी जो सत्य घटना पर आधारित है। यह रेमन की कहानी है जो लकवे से जूझ रहे थे। 28 साल तक उन्होंने इच्छामृत्यु के अधिकार के लिए लड़ाई की और यही फिल्म में दिखाया गया है।

मिलियन डॉलर बेबी

2004 में बॉक्सिंग ट्रेनर और उसके स्टूडेंट की कहानी पर्दे पर पेश की गई थी। एक फाइट में फाइटर पैरालाइज्ड हो जाता है। इसके बाद कोच और उस बच्चे के बीच के बॉन्ड को फिल्म में दिखाया गया है। इसके आखिर में जीवन मृत्यु के बीच के संघर्ष को भी बताया गया है।

सलाम वेंकी

2022 में आई ये फिल्म एक मां और बेटे की कहानी है। इसमें काजोल और विशाल जेठवा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में बताया गया है कि किस तरह से एक मां अपने बच्चे की अंग डोनेट करने की इच्छा पूरी करती। बच्चे की बीमारी को देखते हुए उसकी इच्छामृत्यु का मुश्किल फैसला लिया जाता है।

शायद

बॉलीवुड आज से नहीं बल्कि बहुत पुराने समय से सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाता आ रहा है। 1979 में नसीरुद्दीन शाह सेमी ग्रेवाल फिल्म शायद लेकर आए थे। इसमें यह सवाल उठाया गया था कि लाइलाज बीमारी से पीड़ित मरीज को जीने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए या नहीं।

गुजारिश

ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन की फिल्म भी इसी मुद्दे पर बात करती हुई नजर आती है। 2010 में आई इस फिल्म में एक्टर ने जादूगर का किरदार निभाया था जो एक हादसे की वजह से पैरालाइज हो जाता है। इसके बाद वो इच्छामृत्यु की पिटीशन दायर करता है। फिल्म में ऐश्वर्या राय को नर्स के किरदार में देखा गया था।

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Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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