#SushanthSinghRajput: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

#SushanthSinghRajput: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

मुंबई। कोरोना संकटकाल (Corona Crisis) के बीच मुंबई (Mumbai) से बड़ी खबर मिल रही है। फिल्म धोनी (Film Dhoni) से अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Bollywood Actor Sushant Singh Rajput) ने सुसाइड कर ली है।  राजपूत ने मुंबई में अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी है।अभिनेता की आत्‍महत्‍या की खबर सबसे पहले पुलिस को उनके नौकर ने फोन पर दी। ने सुशांत सिंह राजपूत बॉलीवुड के चर्चित युवा अभिनेताओं में शुमार किए जाते हैं ।बताया जा रहा है बीते कई दिनों से सुशांत परेशान चल रहे थे।हालांकि सुसाइड की वजह अभी स्पष्ट नही हो पाई है।

हैरानी की बात तो ये है कि बीते दिनों ही सुशांत की एक्स-मैनेजर दिशा सलियन (Ex-manager Disha Salian) की मलाड के एक हाईराइज बिल्डिंग से गिर कर मौत हो गई थी। उस वक्त वे शराब के नशे में थी और दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थीं।उनकी मौत पर सुशांत ने शोक जताते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा था, ‘यह एक बुरी खबर है। दिशा के परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। तुम्हारी आत्मा को शान्ति मिले।’

ऐसा रहा बॉलीवुड करियर
सुशांत बॉलीवुड के बेहद लोकप्रिय एक्टर थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी एक्टर के तौर पर की थी। सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर उन्हें पहचान एकता कपूर के धारावाहिक पवित्र रिश्ता से मिली।इसके बाद वे फिल्म काय पो छे में लीड एक्टर के तौर पर नजर आए थे, और उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। इसके बाद सुशांत ने फिल्म धोनी में सबसे ज्यादा चर्चित भारतीय टीम के पूर्व कप्तान एम एस धोनी का किरदार निभा कर बटोरी थी। ये सुशांत के करियर की पहली फिल्म थी जिसने सौ करोड़ का कलेक्शन किया था।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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