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कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय, भुगतान पर राज्य शासन को बड़े निर्देश, बढ़ सकता है वेतन-Pay Revision

Written by:Kashish Trivedi
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नई दिल्ली,डेस्क रिपोर्ट। इन दिनों कर्मचारियों (Employees) के हित में हाई कोर्ट (high court) और सुप्रीम कोर्ट (supreme court) द्वारा बड़े फैसले दिए जा रहे हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से शासकीय कर्मचारी और होमगार्ड (home guard) के लिए बड़े आदेश दिए हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के गृह विभाग को निर्देश देते हुए होमगार्ड के वेतन भुगतान पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। 15 साल से अधिक समय से काम कर रहे होमगार्ड को महज ₹9000 प्रति माह का भुगतान सुप्रीम कोर्ट ने शोषण करार दिया है। अपने फैसले को दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी और होमगार्ड को ₹9000 प्रति माह का भुगतान करना शोषण के अलावा और कुछ नहीं है।

दरअसल को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उड़ीसा राज्य के राज्य सरकार को होमगार्ड की सैलरी पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरथना की पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट के 19 अगस्त 2022 के आदेश का विरोध करने वाली याचिका पर विचार करते हुए निर्देश दिया है कि ₹9000 के भुगतान पर एक होमगार्ड कैसे अपना जीवन व्यतीत कर सकता है। इसके अलावा अपने परिवार के सदस्यों के जीवन को किस प्रकार चलाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्णय देते हुए कहा कि विवाद नहीं है उड़ीसा राज्य में होमगार्ड को केवल ₹9000 प्रति माह का भुगतान किया जाए जबकि अन्य राज्य में पुलिसकर्मियों को लगभग ₹21700 सहित डीए का भुगतान सातवें वेतन आयोग के तहत किया जा रहा है। वही सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि आखिर होमगार्ड जवानों को अन्य पुलिसकर्मियों की तरह सुविधाएं क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही है।

बता दें कि इससे पहले हाई कोर्ट में राज्य के गृह विभाग के तहत 10 से अधिक वर्षों तक काम कर रहे होमगार्ड द्वारा होमगार्ड कल्याण एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य 2015 के 6 एससीसी 247 और बाद में दिनांक 4 मई 2016 अवमानना याचिका में पारित आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देते हुए उड़ीसा राज्य को होम गार्ड के वेतन भुगतान का निर्देश देने के लिए याचिका को प्राथमिकता दी गई थी।

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आपातकाल के दौरान सहित अन्य उद्देश्यों के लिए होमगार्ड का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं उन्हें पुलिस कर्मियों के सम्मानित किया गया है तो ऐसे में होमगार्ड को भी ड्यूटी भत्ता का भुगतान किया जाना चाहिए और उनकी सैलरी भी पुलिसकर्मियों जितनी होनी चाहिए। होमगार्ड ने याचिका दायर करते हुए दूसरे राज्य द्वारा अपने समकक्ष को दी जाने वाली तारीख से सातवें वेतन आयोग के लाभ की भी मांग की थी। इससे पहले उड़ीसा उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक आदेश में कहा था कि 10 नवंबर 2016 के बजाय जनवरी 2020 से होमगार्ड को प्रति दिन ₹533 की दर से भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि ओडिशा में होमगार्डों को केवल 9,000 रुपये प्रति माह यानी 300 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है और वे अब 15 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। जबकि अन्य राज्य में पुलिस कर्मियों को प्रति माह लगभग 21,700 रुपये मिल रहे हैं।

SC ने कहा 9, 000 रुपये प्रति माह का भुगतान करना शोषण के अलावा और कुछ नहीं है। एक होमगार्ड कर्मी 9,000 रुपये प्रति माह के भुगतान पर अपने परिवार के सदस्यों को कैसे रख सकता है, जब वह लगभग समान / समान कर्तव्यों का पालन कर रहा हो जो अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा किया जाता है।

इसलिए, हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह केवल होमगार्डों को 9,000 रुपये प्रति माह का भुगतान करने के अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं। जिसमें ओडिशा सरकार को जनवरी, 2020 से होमगार्ड को प्रति दिन 533 रुपये की दर से पारिश्रमिक का भुगतान करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत अब गर्मी की छुट्टियों के बाद जुलाई में मामले की सुनवाई करेगी।

Kashish Trivedi
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