पहलगाम हमले के बाद मोदी सरकार का बड़ा फैसला, सिंधु जल समझौता रोका, एक हफ्ते में पाकिस्तान के राजनयिक छोड़े भारत

भारत ने पहलगाम हमले के बाद बड़ा कदम उठाया है। पकिस्तानियों के लिए SAARC वीजा पर रोक लगाया गया है। उन्हें भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है।
PM Modi pahalgam terror attack

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार एक्शन में है। 23 अप्रैल को सीसीएस बैठक (CCS Meeting) में प्रधानमंत्री ने कई अहम फैसले लिए हैं। एक हफ्ते के भीतर पाकिस्तान के राजनयिक को भारत छोड़ने का आदेश जारी किया गया है। इसके अलावा पकिस्तानियों का वीजा भी रद्द कर दिया गया है। उन्हें भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। अब देश में पकिस्तानियों को आने की अनुमति नहीं होगी।

बुधवार को मोदी सरकार ने पाकिस्तान में स्थित भारतीय दूतावास भी बंद करने का ऐलान कर दिया है। सभी राजनयिक को भी वापस बुलाया गया है। सेवा सलाहकारों के 5 सहायक कर्मचारियों को भी दोनों उच्चयोगों से वापस बुलाया जाएगा। 1 मई तक उच्चयोगों की संख्या 55 से घटाकर 30 हो जाएगी।

सरकार के अन्य बड़े फैसले

अटारी चेक पोस्ट भी बंद रहेंगे। जो लोग समर्थन के साथ बॉर्डर पार कर चुके हैं, उन्हें 1 मई 2025 तक वापस आने का निर्देश दिया गया है। 1960 के सिंधु जल समझौते पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाया गया है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को त्याग नहीं देता यह आदेश लागू रहेगा।

मीटिंग में शामिल हुए ये लोग

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ। 28 लोगों ने अपनी जान गवा दी। जिसके अगले दिन ही पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग में स्थित पीएम आवास में बुलाई। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पीएम मोदी के सचिव, विदेश सचिव, विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान देश की सुरक्षा और आतंकी हमले को लेकर चर्चा हुई।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews