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गुजरात का थावड़ गांव बना एशिया का नंबर वन दूध उत्पादक केंद्र, हर महीने 7–8 करोड़ की आय

Written by:Neha Sharma
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गुजरात के बनासकांठा जिले का थावड़ गांव दूध उत्पादन के क्षेत्र में एशिया का नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। यह गांव जिले की सबसे बड़ी थावड़ दूध मंडली के लिए जाना जाता है, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार पहले स्थान पर बनी हुई है।
गुजरात का थावड़ गांव बना एशिया का नंबर वन दूध उत्पादक केंद्र, हर महीने 7–8 करोड़ की आय

गुजरात के बनासकांठा जिले का थावड़ गांव दूध उत्पादन के क्षेत्र में एशिया का नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। यह गांव जिले की सबसे बड़ी थावड़ दूध मंडली के लिए जाना जाता है, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार पहले स्थान पर बनी हुई है। लगभग 8,000 की आबादी वाले इस गांव से रोजाना 57,000 किलोग्राम दूध का संग्रह होता है। यही नहीं, यहां के पशुपालकों के खातों में हर महीने 7 से 8 करोड़ रुपये तक की आय जमा होती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

एशिया का नंबर वन दूध उत्पादक केंद्र

थावड़ दूध मंडली ने वर्षों की मेहनत और संगठित प्रयास से यह मुकाम हासिल किया है। इसकी शुरुआत वर्ष 1975 में महज 10 लीटर दूध संग्रह से हुई थी, लेकिन आज यह मंडली हर महीने 20 से 22 लाख लीटर दूध एकत्र करती है। धानेरा तालुका के इस गांव की मंडली ने इस वर्ष 71 करोड़ रुपये का दूध खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया है। इस कारण गांव और पूरे जिले के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।

बनास डेयरी, जो एशिया की सबसे बड़ी दूध उत्पादक डेयरी है, इस मंडली को हर स्तर पर सहयोग करती है। मंडली पशुपालकों को क्रेडिट पर दाना, मकई, पशुपालन से जुड़े उपकरण और जीवनोपयोगी सामान उपलब्ध कराती है। यहां तक कि गांव में “उमंग मॉल” भी बनाया गया है, जहां पशुपालकों को रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं उधार मिलती हैं। बीमार पशुओं के लिए केवल 120 रुपये में इलाज और दवा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, अगर किसी पशुपालक को ऋण की जरूरत होती है, तो मंडली उनकी गारंटी देकर सरकारी बैंकों से कर्ज दिलवाती है।

मंडली का संचालन चेयरमैन उमाभाई पटेल और मंत्री जगदीशभाई पटेल के नेतृत्व में हो रहा है। इसमें कुल 1,400 ग्राहक जुड़े हुए हैं। आज थावड़ गांव में 500 से अधिक तबेले हैं, जिनके सहारे दूध उत्पादन का यह विशाल नेटवर्क चलता है। लगातार 15 वर्षों तक जिले में नंबर वन पर रहने वाली यह मंडली अब पूरे देश के लिए उदाहरण बन चुकी है।