बर्ड फ्लू के खतरे के बीच डबरा में दो मोरों की मौत से सनसनी

बर्ड फ्लू के खतरे के बीच डबरा में दो मोरों की मौत से सनसनी

डबरा, सलिल श्रीवास्तव| बर्ड फ्लू (Bird Flu) का असर देश के साथ साथ प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है| इसी तरह ग्वालियर (Gwalior) जिले के डबरा (Dabra) में दो मोर (Peacock) मृत पाए गए| वार्ड नंबर 9 में स्थानीय लोगो को दो मोर खेत मे मरे दिखे जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई| सूचना वन विभाग और पशु विभाग को मिली तो उनकी टीम भी मौके पर पहुँची और मृत मोरों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कर जांच करने की बात कही

आपको बता दें जब वार्ड के पार्षद पति बृजेश शाक्य ने सीएमओ प्रदीप भदौरिया को सूचना दी तो सीएमओ ने कहा जेसीबी मशीन भेज कर मोरों को दफना देते हैं| जबकि मोर राष्ट्रीय पक्षी है और सम्मान के साथ मोर का अंतिम संस्कार होना चाहिए, लेकिन सीएमओ ने पार्षद पति से मोरों को दफनाने की बात कही| वहीं वन विभाग ने मोरों के शव को अपने कब्जे में लेकर विधिवत अंतिम संस्कार कराने की बात कही है।

फ़िलहाल मोरों की मौत किन कारण के चलते हुई है यह स्पष्ट नहीं है पर मोरों की मौत से इलाक़े में सनसनी फैल गई है। प्रदेश भर में पक्षियों की मौतें हो रही है, बर्ड फ्लू का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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