“छात्रों की गूँज” मिमिक्री विवाद: सिंधिया बोले- ये जोक नहीं था, भारत की हर माँ पर मजाक था, राहुल गांधी पर साधा निशाना

राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री और "माँ को कुर्सी दो" को लेकर एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
Jyotiraditya Scindia attack Rahul Gandhi

Jyotiraditya Scindia attack Rahul Gandhi

मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितम्बर को आयोजित राहुल गांधी के छात्रों की गूँज कार्यक्रम में हुआ मिमिक्री विवाद अभी शांत नहीं हुआ है सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया में इसे लेकर चर्चा जारी है, कांग्रेस और उनकी समर्थक पार्टियों के नेता भले ही राहुल गांधी का बचाव कर रहे हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार हमलावर हैं इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

युवाओं के मुद्दे उठाने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों की गूँज कार्यक्रम लॉन्च किया है अब तक इसके पांच कार्यक्रम कर चुके हैं, पांचवा आयोजन इंदौर में 19 सितम्बर को हुआ था जो विवादों में घिर गया है, हालाँकि कार्यक्रम में भारी भीड़ थी युवाओं की संख्या भी लाखों में बताई गई है लेकिन मंच पर राहुल गांधी ने जो कामेडियन के साथ किया उसने पूरा विवाद खड़ा कर दिया जिसमें छात्रों के असली मुद्दे दब गए।

मिमिक्री बनी विवाद की वजह 

मीडिया में भी राहुल गांधी के कार्यक्रम की चर्चा है, भाजपा के नेता पीएम मोदी की मिमिक्री के दौरान उनके “माँ को कुर्सी दो” वाले एक्ट को लेकर हमलावर है और उसे एक माँ का अपमान बता रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसकी कड़ी निंदा की है और राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

देश की जनता कांग्रेस को देगी जवाब 

ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए सिंधिया ने कहा जो लोग  भारत की सनातन परंपरा का सम्मान नहीं करते उनकी जितनी भी निंदा की जाए कम है, उन्होंने कहा ये कोई जोक नहीं था ये भारत की हर माँ का मजाक था,  सिंधिया बोले देश के विपक्ष के नेता खुले मंच पर जब किसी माँ की खिल्ली उड़ाई जाये और वे जोर से ठहाके लगायें इससे बड़ी निंदा की कोई बात नहीं हो सकती इसका जवाब देश की जनता कांग्रेस को जरुर देगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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