माकपा का आरोप- “औरंगाबाद की घटना मजदूरों की मृत्यु नहीं हत्या”, धिक्कार दिवस मनाया

माकपा का आरोप- “औरंगाबाद की घटना मजदूरों की मृत्यु नहीं हत्या”, धिक्कार दिवस मनाया

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

औरंगाबाद में रेल की पटरी पर मालगाड़ी से कटकर हुई मजदूरों की मौत के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में बहुत रोष है। पार्टी ने मजदूरों को श्रद्धांजलि देते हुए शनिवार को धिक्कार दिवस मनाया और सरकार से मांग की कि मजदूरों के परिवार को एक करोड़ रुपये सहायता राशि दी जाए।

माकपा ने शनिवार को पार्टी कार्यालय के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए धिक्कार दिवस मनाया। माकपा नेताओं ने कहा कि सरकारी घोषणाओं के बाद भी मजदूरों के पास न तो कोई राहत है उल्टा रोजगार के छीन जाने के कारण,भूखे-प्यासे मजदूरों द्वारा घर लौटते समय औरंगाबाद में रेल की पटरी पर कट जाते है इसे महज रेल हादसा या मानवीय भूल नहीं कहा जा सकता है। यह सरकार की मजदूर, गरीब विरोधी नीति का परिणाम है यह सरकार द्वारा श्रमिकों की हत्या है। सरकार ने यदि उन्हें कम से कम घर लौटने की व्यवस्था कर दी होती तो आज इनके घरों में मातम नहीं होता। पार्टी ने इस दिल दहला देने वाले हादसे पर भी प्रधानमंत्री की खामोशी की निंदा की। माकपा कार्यकर्ताओं ने नई सड़क स्थित जिला कार्यालय व हजीरा स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर आवश्यक दूरी बनाते हुए इसके विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर माकपा नेताओं ने सरकार से मांग की कि सभी मृतक के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा दिया जाए, प्रवासी मजदूरों को घर तक पहुंचाने की सरकार समुचित व्यवस्था करे।

विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह के अलावा माकपा जिला सचिव अखिलेश यादव, रामविलास गोस्वामी, श्याम यादव, रामबाबू जाटव, श्रीकृष्ण बघेल, प्रीति सिंह, मोहम्मद यूसुफ अब्बास, हेतराम केम, गौतम आर्य, ग़ालिब अली, सगरदीप सागर, आबिद खान, शाहिद खान, सतीश कुमार शर्मा, संजय सिंह राजपूत, रामबरन, जितेंद्र सिंह, उमेश गिरी, सौरव श्रीवास्तव, जीतू अहिरवार, चंदनिया बाई, रामजीलाल, सचिन सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।

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