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ग्वालियर में जानलेवा कार्बाइड गन पर प्रतिबंध, 3 दिन में 19 युवा घायल होने के बाद प्रशासन का सख्त एक्शन

Written by:Banshika Sharma
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ग्वालियर में कार्बाइड गन से लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर ने इसके निर्माण, खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। पिछले तीन दिनों में अंचल में 19 युवा इस गन से अपनी आंखों को गंभीर रूप से घायल कर चुके हैं।
ग्वालियर में जानलेवा कार्बाइड गन पर प्रतिबंध, 3 दिन में 19 युवा घायल होने के बाद प्रशासन का सख्त एक्शन

ग्वालियर: दिवाली के मौके पर जानलेवा साबित हो रही कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) पर ग्वालियर जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले तीन दिनों में अंचल में 19 युवाओं के इस गन से घायल होने के बाद यह फैसला लिया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने आदेश जारी करते हुए जिले में कार्बाइड गन और प्लास्टिक पाइप से बने ऐसे उपकरणों के निर्माण, खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

प्रशासन का यह कदम अस्पतालों में लगातार आ रहे गंभीर मामलों के बाद उठाया गया है। ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल, जेएएच और रतन ज्योति नेत्रालय में आतिशबाजी और खासकर कार्बाइड गन से आंखें जलाने के कई मामले सामने आए हैं। अकेले रतन ज्योति नेत्रालय में ही करीब 15 ऐसे मरीज भर्ती हैं। बुधवार को आठ घायलों की आंखों का ऑपरेशन किया गया, लेकिन उनकी रोशनी कितनी लौटेगी, यह कहना अभी मुश्किल है।

ऑनलाइन खरीदी गन, अब आंखों की रोशनी दांव पर

भिंड निवासी सत्येंद्र सिंह गुर्जर और सूरज गुर्जर के लिए ऑनलाइन शॉपिंग एक भयावह अनुभव बन गई। ग्वालियर के डीडी नगर में किराए पर रहने वाले इन युवकों ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखकर 200 रुपये में एक कार्बाइड गन ऑनलाइन खरीदी थी। मंगलवार रात जब वे इसे चला रहे थे, तो ट्रिगर दबाने पर धमाका नहीं हुआ।

सत्येंद्र ने जैसे ही गन के उस हिस्से में झांकने की कोशिश की, जहां से पानी डाला जाता है, तभी अचानक तेज धमाका हो गया। इस हादसे में सत्येंद्र और सूरज दोनों की आंखों का कॉर्निया जल गया। सूरज की आंख का ऑपरेशन कर दिया गया है, लेकिन सत्येंद्र की चोट इतनी गंभीर है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल एम्स रेफर कर दिया है।

क्यों खतरनाक है कार्बाइड गन?

यह देशी गन बेहद खतरनाक तरीके से काम करती है। इसमें कैल्शियम कार्बाइड के टुकड़ों पर पानी डाला जाता है, जिससे एसिटिलीन (इथाइन) गैस बनती है। यह गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है और लाइटर से चिंगारी मिलते ही तेज धमाके के साथ जलती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह गैस और इससे निकलने वाली चिंगारी आंखों के कॉर्निया और फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है। शिवपुरी जिले में भी अब तक 14 लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से 4 की आंखों की रोशनी पर गंभीर खतरा है।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

जिला प्रशासन ने इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

“आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के साथ ही अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत दंडनीय होगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” — रुचिका चौहान, कलेक्टर

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री या इस्तेमाल की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0751-7049101029, 0751-2363636 या 0751-2445333 पर दें।

अतुल सक्सेना की रिपोर्ट

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Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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