सड़क पर चलते समय सबसे बड़ा डर होता है, अचानक आने वाला ब्लैक स्पॉट। जहां बार-बार हादसे होते हैं, जहां लोग अपनी जान गंवाते हैं। अब ग्वालियर से बैतूल होते हुए नागपुर तक बनने जा रहे नए हाईवे कॉरिडोर में ऐसे खतरनाक स्थानों को खत्म करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर शुरुआती काम शुरू कर दिया है। करीब 569 किलोमीटर लंबे इस सिक्स लेन हाईवे की अनुमानित लागत 40 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर में ब्लैक स्पॉट खत्म करने की तैयारी
फिलहाल एनएचएआई के माध्यम से सिवनी जिले के लखनादौन और खवासा के बीच ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए सलाहकार एजेंसी चयन की प्रक्रिया जारी है। इन स्थानों पर अंडरपास, ओवरब्रिज और जरूरी पुलों का निर्माण किया जाएगा।
ब्लैक स्पॉट वे जगहें होती हैं जहां सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस नए ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर में शुरुआत से ही सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। अंडरपास बनने से स्थानीय ट्रैफिक को अलग रास्ता मिलेगा और हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही सुरक्षित होगी। यह कदम केवल निर्माण नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
569 किमी लंबा सिक्स लेन हाईवे: किन-किन शहरों से गुजरेगा मार्ग
प्रस्तावित ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से होते हुए नागपुर तक जाएगा। ग्वालियर से शुरू होकर यह मार्ग नागपुर तक पहुंचेगा। यह पूरा कॉरिडोर सिक्स लेन हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा।
एनएचएआई के अनुसार, जल्द ही अलाइनमेंट और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। अभी इस बात पर मंथन चल रहा है कि यह परियोजना ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर बनेगी या मौजूदा सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा।
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का मतलब है कि नई जमीन पर नया हाईवे बनाया जाएगा। वहीं, चौड़ीकरण में पुरानी सड़क को और बड़ा किया जाएगा। दोनों विकल्पों पर तकनीकी और आर्थिक अध्ययन किया जा रहा है।
दिल्ली से नागपुर तक सीधा कनेक्शन बनने की संभावना
इस ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर को आगरा-ग्वालियर के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना भी सामने आई है। अगर ऐसा होता है तो यह मार्ग सीधे दिल्ली से नागपुर तक जुड़ जाएगा। इससे उत्तर भारत और मध्य भारत के बीच सीधा और तेज संपर्क बनेगा। दिल्ली से महाराष्ट्र तक यात्रा का समय कम होगा और सड़क नेटवर्क मजबूत होगा।
यह कॉरिडोर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी परिवहन धुरी के रूप में उभर सकता है। लंबे समय से उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाले वाहनों को कई राज्यों से होकर गुजरना पड़ता है। नया हाईवे इस यात्रा को सरल और तेज बना सकता है।
माल परिवहन और उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा
ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर बनने से माल परिवहन की रफ्तार बढ़ेगी। उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक सामान तेजी से पहुंच सकेगा। आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित लॉजिस्टिक पार्क से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश का माल ग्वालियर होते हुए महाराष्ट्र तक कम समय में पहुंच पाएगा।
इससे ट्रांसपोर्ट लागत कम हो सकती है। उद्योगों को कच्चा माल जल्दी मिलेगा और तैयार माल समय पर बाजार तक पहुंचेगा। इससे व्यापार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।






