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ग्वालियर: महिला शिक्षिका का BAC पर रिश्वत मांगने का आरोप, अधिकारी बोले- कार्रवाई से बचने का पैंतरा, तीन बार स्कूल में मिलीं अनुपस्थित

Written by:Ankita Chourdia
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ग्वालियर में शिक्षा विभाग के एक अधिकारी पर महिला शिक्षिका ने गंभीर आरोप लगाए हैं। BAC पर स्कूल निरीक्षण के नाम पर परेशान करने और 1000 रुपए रिश्वत मांगने का दावा किया गया है।

मुख्यमंत्री के महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के निर्देशों को सरकारी मुलाजिम किस तरह पलीता लगा रहे हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर कर्मचारियों को परेशान कर रहे हैं, इसका एक और सनसनीखेज उदाहरण प्रदेश के ग्वालियर जिले से सामने आया है। यहाँ भितरवार के मावठा सरकारी प्राइमरी स्कूल में पदस्थ एक महिला शिक्षिका मनीषा शिवहरे ने अपने ब्लॉक अकादमिक समन्वयक (BAC) मुकेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका का सीधा आरोप है कि अधिकारी उन्हें न सिर्फ जानबूझकर परेशान कर रहे हैं, बल्कि उनसे पैसों की मांग भी की जा रही है।

इस पूरे मामले को लेकर शिक्षिका ने ग्वालियर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से लिखित शिकायत की है, और सोमवार को उन्होंने एक बार फिर अपनी अर्जी वरिष्ठ अफसरों को सौंपी। मनीषा शिवहरे ने बताया कि वे स्कूल में अध्यापन कार्य के साथ-साथ दिव्यांग (विकलांग) बच्चों की देखरेख का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालती हैं। इस विशेष कार्य के चलते उन्हें अक्सर फील्ड में जाना पड़ता है और दफ्तर जाकर कंप्यूटर पर संबंधित जानकारी प्रेषित करनी होती है। मैडम का आरोप है कि जब भी वे इस सरकारी दायित्व के निर्वहन हेतु स्कूल से बाहर होती हैं, तो अधिकारी मुकेश यादव जानबूझकर उनके स्कूल का औचक निरीक्षण करने पहुँच जाते हैं।

क्या है पूरा मामला?

शिक्षिका ने विस्तार से बताया कि 10 मार्च 2026 को सुबह सवा 10 बजे अधिकारी मुकेश यादव उनके स्कूल पहुँचे थे। उस समय स्कूल में कोई भी अन्य शिक्षिका उपस्थित नहीं थी। चौंकाने वाला आरोप यह है कि अधिकारी ने न तो उपस्थिति रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर अंकित किए और न ही स्कूल की डायरी में किसी प्रकार की कमी का उल्लेख किया। मैडम ने इस पर गहरा सवाल उठाया कि स्कूल में कुल तीन शिक्षिकाएँ पदस्थ हैं, लेकिन कारण बताओ नोटिस सिर्फ दो ही लोगों को जारी किया गया, जो अधिकारी की मंशा पर संदेह पैदा करता है।

मनीषा शिवहरे का कहना है कि जिस दिन उन्हें स्कूल से अनुपस्थित बताया गया, उस दिन वे बिना बताए नहीं बल्कि विभाग के ही आदेशानुसार दूसरे स्कूलों (छिरेटा और समाया) के सरकारी दौरे पर थीं। उन्होंने अपने इस कार्य की तस्वीरें भी विभागीय वॉट्सऐप ग्रुप पर साझा की थीं। शिक्षिका का आरोप है कि जब उन्होंने अधिकारी की इस मनमानी और उत्पीड़न भरी हरकत का पुरजोर विरोध किया, तो उनसे ‘मामला शांत’ करने के लिए 1000 रुपए की मांग की गई।

जब शिक्षिका ने ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करने की बात कहते हुए पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो अधिकारी ने उन्हें खुले तौर पर धमकी दी कि ‘अब तो कुछ बड़ा करना पड़ेगा।’ इस धमकी के ठीक बाद, 13 अप्रैल 2026 को मैडम के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। यह घटनाक्रम शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की पोल खोलता प्रतीत होता है।

अधिकारी मुकेश यादव ने सभी आरोपों को बताया मनगढ़ंत

दूसरी ओर, जब इस पूरे प्रकरण में अधिकारी मुकेश यादव से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने शिक्षिका द्वारा लगाए गए इन सारे आरोपों को सिरे से गलत और मनगढ़ंत करार दिया। उनका स्पष्ट कहना है कि उन्होंने तीन बार स्कूल का औचक निरीक्षण किया था और तीनों ही बार मैडम स्कूल से अनुपस्थित पाई गईं। मुकेश यादव ने आगे कहा कि इसी घोर लापरवाही के चलते उन्हें नियमानुसार नोटिस जारी किया गया है। अब इस कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए मैडम उन पर बेबुनियाद और झूठे आरोप लगा रही हैं। उन्होंने इस संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे मामले की सच्चाई से अवगत करा दिया है।

Ankita Chourdia
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