रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने दो सहकारी बैंकों के खिलाफ सख्ती (RBI Action) दिखाई है। केवाईसी और लोन एंड एडवांस से संबंधित दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन न करने पर जुर्माना लगाया गया है। इस बात की जानकारी आरबीआई 8 जून को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया गया है।
महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित अमरावती मर्चेंट्स सहकारी बैंक लिमिटेड पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हरियाणा में स्थित द करनाल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 3 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। 31 मार्च 2025 तक बैंक के वित्तीय स्थिति के संदर्भ में नाबार्ड/आरबीआई द्वारा एक संवैधानिक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के पालन में खामियों का पता चला।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों ही बैंकों को नोटिस जारी करते हुए आरबीआई ने स्पष्टीकरण मांगा। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर आरोप सही साबित हुए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंकों ने किया इन नियमों का उल्लंघन
अमरावती मर्चेंट्स सहकारी बैंक लिमिटेड ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। द करनाल सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में खातों के जोखिम वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक व्यवस्था लागू नहीं कर कर पाया। इसके अलावा लेनदेन की प्रभावी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए मजबूत सॉफ्टवेयर भी लागू नहीं कर पाया।
क्या ग्राहकों पर असर पड़ेगा?
देशभर के सभी बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया रेगुलेट करता है। जब भी कोई कंपनी या बैंक नियमों का उल्लंघन करता है, तो आरबीआई कार्रवाई करता है। हालांकि जुर्माने का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। इस बात की पुष्टि खुद सेंट्रल बैंक ने की है। आरबीआई ने कहा, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक और ग्राहक के बीच किसी भी ट्रांजेक्शन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव डालना नहीं है।”






