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विरोध का अनोखा तरीका, समस्या लिखे पोस्टर की माला पहनकर ग्वालियर नगर निगम की जन सुनवाई में पहुंचा युवक

जब निगम अफसरों ने नहीं सुना तो समस्या लिखे पोस्टर की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंच गया युवक... तस्वीरों के जरिये दिखाया शहर की बदहाल सड़कों का हाल ...
A unique form of protest in Gwalior

A unique form of protest in Gwalior

ग्वालियर नगर निगम की जनसुनवाई में लोगों की समस्या को सुन रहे अफसर उस समय चौंक गए जब एक युवक  शहर की समस्या लिखे पोस्टर की बड़ी से माला पहने वहां पहुंच गया, पोस्टर पर शहर की बदहाल सड़क, उफनते सीवर, सड़कों पर गन्दगी और कीचड़ की तस्वीरें थी जिसकी तरफ वो नगर निगम कमिश्नर का ध्यान आकर्षित करना चाहता था।

विजय माहौर नामक युवक ने विरोध करने का अनोखा तरीका अपनाया, बकौल विजय वो कई बार ग्वालियर दक्षिण विधानसभा की ख़राब बदहाल सड़कों की समस्या को लेकर नगर निगम में शिकायत कर चुका है, आवेदन दे चुका है लेकिन किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया इसलिए उसने समस्या लिखे पोस्टर की माला पहनकर आने का फैसला किया।

ग्वालियर नगर निगम की जन सुनवाई में पहुंचे विजय ने अधिकारियों से कहा कि सड़कों की हालत बहुत ख़राब है, बड़े बड़े गड्डे हो चुके हैं , गन्दगी है,  कीचड़ है, सीवर उफन रहे हैं लेकिन इसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा उसने बताया कि वो नगर निगम परिषद् के बैठक में दौरान भी गया था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

पूर्व कमिश्नर संघप्रिय से भी की थी शिकायत 

विजय ने कहा वो पूर्व कमिश्नर संघप्रिय से भी मिला था उन्हें आवेदन दिया था उनकी जनसुनवाई में भी जाकर आवेदन दिया था लेकिन एक महीने बाद भी कोई काम नहीं हुआ इसलिए मैं आज नए कमिश्नर अभिषेक चौधरी से मिलने आया था लेकिन अफ़सोस वो जनसुनवाई में नहीं मिले।

निगम अफसर फिर बोले, जल्द होगा निराकरण  

विजय का आवेदन लेने के बाद अपर आयुक्त प्रदीप तोमर ने कहा कुछ जगह बारिश के कारण जलभराव की स्थिति है, सड़कों के गड्डे भरने का काम चल रहा है जल्दी ही सभी सड़कें सही कर दी जायेंगी। बहरहाल विजय जैसे कई ऐसे लोग हैं जो ऐसी समस्या से परेशान हैं और शिकायतें कर चुके हैं लेकिन निगम अफसरों के कान पर जूं नहीं रेंगती, देखना होगा शहर की सड़कें कब तक सुधरती हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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