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हिंदू महासभा की मांग, नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के न्यायालय में दिए गए कथन को स्कूली पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाए

Written by:Atul Saxena
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हिंदू महासभा ने कहा हमारी मांग है कि न्यायालय में दिए गोडसे और आप्टे के बयान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, चाहें वो मप्र का पाठ्यक्रम हो या फिर सीबीएसई का
हिंदू महासभा की मांग, नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के न्यायालय में दिए गए कथन को स्कूली पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाए

Gwalior News : महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और उसके साथी नारायण आप्टे को अपना आदर्श मानने वाली हिंदू महासभा ने एक बार फिर उनकी पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में ग्वालियर में मनाया, महासभा के नेताओं ने पार्टी कार्यालय में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के चित्र पर माल्यार्पण किया और आरती की, इस अवसर पर पार्टी ने सरकार से एक बड़ी मांग की है।

हिंदू महासभा ग्वालियर में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे की जयंती और पुण्यतिथि पर पार्टी कार्यालय पर पूजन कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, हिंदू महासभा गोडसे और आप्टे को हुतात्मा कहती है और उन्हें महात्मा गांधी का हत्यारा नहीं मानती बल्कि गांधी को एवं कांग्रेस को देश के विभाजन का जिम्मेदार मानती है और गोडसे एवं आप्टे के कृत्य को इसका प्रतीकार बताती है।

महात्मा गांधी के खिलाफ फिर उगला जहर, बताया विभाजन का जिम्मेदार 

हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जयवीर भारद्वाज ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस देश के विभाजन के लिए मोहनदास करमचंद गांधी और कांग्रेस जिम्मेदार हैं देश को ये हकीकत जाननी और समझनी होगी, उन्होंने कहा कि इस विभाजन के कारण लाखों लोगों की जानें गई , महिलाओं बच्चियों के साथ दुष्कर्म हुआ जिससे देश में गुस्सा था। हिंदू महासभा नेता ने कहा कि मोहन दास करमचंद गांधी ने तो विभाजन के बाद पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिए जाने की जिद की थी और इसके लिए अनशन भी किया था, ये सब बातें नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को सही नहीं लगी और प्रतीकार करते हुए उन्होंने गोली चला दी।

गोडसे और आप्टे का कोर्ट में दर्ज बयान स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल हो 

डॉ भारद्वाज ने कहा कि उस समय फांसी से पहले नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे में न्यायालय में अपना कथन दर्ज कराया था जिसमें इन सब बातों का उल्लेख है, इसलिए पूरे देश को ये सच्चाई जानने का अधिकार है, हमारी मांग है कि न्यायालय में दिए गोडसे और आप्टे के बयान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, चाहें वो मप्र का पाठ्यक्रम हो या फिर सीबीएसई का, ये सच्चाई सबके सामने आनी ही चाहिए कि देश के विभाजन के लिए कौन जिम्मेदार है।

ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

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