10 करोड़ रुपये कीमत की 27 हजार पेटी बीयर पर चढ़ाई जेसीबी और बुलडोजर, ये है वजह

10 करोड़ रुपये कीमत की 27 हजार पेटी बीयर पर चढ़ाई जेसीबी और बुलडोजर, ये है वजह

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। आबकारी विभाग (Excise Department) इन दिनों मंदिरा नष्टीकरण विशेष अभियान चला रहा है। अभियान के अंतर्गत विभाग ने शुक्रवार को एक कंपनी के गोदाम में रखी 27 हजार पेटी बीयर को नष्ट कर दिया। नष्ट की गई बीयर की कीमत 10 करोड़ रुपये बताई गई है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन (Lockdown) के चलते बीयर की बिक्री नहीं हो पाई थी और अब ये एक्सपायर हो गई थी।

गौरतलब है कि मंदिरा नष्टीकरण विशेष अभियान चलाकर आबकारी विभाग इन दिनों जब्त की गई शराब को नष्ट कर रहा है लेकिन शुक्रवार को विभाग ने 27 हजार पेटी बीयर को जेसीबी मशीन और बुलडोजर के नीचे दबाकर नष्ट कर दिया। खास बात ये है कि ये बीयर एक अधिकृत कंपनी के गोदाम में रखी थी इसका नष्टीकरण अलग कारण के चलते हुआ।

आबकारी इंस्पेक्टर एस एस राठौर के मुताबिक लॉक डाउन के चलते 27 हजार पेटी बीयर की बिक्री नहीं हो सकी और ये पिछले छह महीने से गोदाम में रखी है। जब इसकी एक्सपाइरी डेट निकल गई तो ये उपयोग के लायक नहीं बची तो नियमानुसार इसे वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में नष्ट कर दिया गया। नष्ट की गई बीयर की कीमत 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। विभाग ने ये कार्रवाई बरौआ गांव के पास एनाइजर व्रूच इनवेव इंडिया FL 10 (A) एबी रोड पर की। सुबह से शुरू हुई कार्रवाई खबर लिखे जाने तक जारी थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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