रेत माफियाओं की करतूत, सड़क को बनाया दलदल

रेत माफियाओं की करतूत, सड़क को बनाया दलदल

ग्वालियर/भितरवार।

भितरवार अनुभाग के ग्राम करियावटी में इन दिनों ग्रामवासी रेत माफियाओं का दंश झेल रहे हैं। ग्राम करिया वटी से धूमेश्वर जाने वाली रास्ते को रेत माफियाओं ने दलदल बना दिया है। दरअसल भितरवार रोड से धूमेश्वर जाने वाले रास्ते पर ग्राम करिया वटी में आधा किलो मीटर रास्ते को रेत माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से संचालित हो रहे रेत उत्खनन एवं रेत परिवहन को लेकर ग्रामवासी हर संभव प्रयास कर रहे हैं और अधिकारियों से भी शिकायत कर रहे हैं लेकिन कहते हैं कि पैसे की चमक सब को फीका कर देती है इस रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों रेत से भरे अवैध ट्रक निकल रहे हैं जिसकी वसूली रेत माफियाओं से भितरवार प्रशासन को पहुंच रही है यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे लोगों की समस्या को हल करने वाला कोई नहीं है आप तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कि किस तरह से करें रोटी गांव में आम रास्ते पर दलदल बना हुआ है जिसमें से धूमेश्वर दर्शन करने वाले लोगों के साथ-साथ शिवपुरी क्षेत्र में जाने वाले लोग भी इस दलदल भरे रास्ते से निकल रहे हैं कभी-कभी तो इसमें लोग गिर भी जाते हैं लेकिन प्रशासन को क्या सब अपनी अपनी तिजोरियां भरने में लगे हुए हैं किसी को कोई मतलब नहीं इसके अलावा बीते दिनों जनपद अध्यक्ष अनीता मोती सिंह रावत द्वारा भी इस अवैध खदान को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की गई थी और रेत माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ा गया था जिसके एवज में एसपी ग्वालियर आईजी ग्वालियर भितरवार एसडीएम आदि को आवेदन देकर अवैध खदान पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाया गया था लेकिन अब क्या हुआ है की कार्रवाई रुक गई या ठंडे बस्ते में चली गई।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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