Hindi News

हरदा किसान आंदोलन: हजारों ट्रैक्टरों से घिरा शहर, मांग पूरी होने तक डटे रहेंगे किसान

Written by:Bhawna Choubey
Published:
हरदा किसान आंदोलन ने पूरे मध्य प्रदेश का ध्यान खींच लिया है। हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में राशन, तंबू और जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं और समर्थन मूल्य पर खरीदी सहित अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित धरने पर बैठ गए हैं।
हरदा किसान आंदोलन: हजारों ट्रैक्टरों से घिरा शहर, मांग पूरी होने तक डटे रहेंगे किसान

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जहां आम दिनों में सड़कों पर सामान्य आवाजाही रहती थी, वहीं अब हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली और किसानों की भीड़ ने पूरे शहर का माहौल बदल दिया है। खेतों से निकले किसान अब सड़कों पर अपने हक की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।

यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं है। किसान अपने साथ पूरा घर लेकर आए हैं राशन, पानी, तंबू, बिस्तर और यहां तक कि कूलर-पंखे तक। यह साफ संकेत है कि यह आंदोलन कुछ घंटों या दिनों का नहीं, बल्कि लंबी लड़ाई का रूप ले चुका है।

हजारों ट्रैक्टरों ने शहर को घेरा

हरदा किसान आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापकता है। जिले की चारों सीमाओं से हजारों किसान ट्रैक्टर लेकर शहर में पहुंचे हैं। इंदौर रोड, हनुमान मंदिर और खंडवा बाईपास जैसे प्रमुख चौराहों पर किसानों ने डेरा डाल दिया है। इस दौरान शहर में लंबा जाम लग गया और आम लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हर तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉली की कतारें नजर आ रही हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। यही कारण है कि हरदा किसान आंदोलन अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली में राशन, तंबू और पूरा इंतजाम

इस आंदोलन की एक और बड़ी तस्वीर यह है कि किसान पूरी तैयारी के साथ आए हैं। वे सिर्फ प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि लंबी लड़ाई लड़ने के इरादे से पहुंचे हैं। किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉली में आटा, दाल, पानी की टंकियां, तिरपाल, लकड़ी, बर्तन और यहां तक कि जनरेटर भी मौजूद हैं। कुछ किसानों ने अपने साथ कूलर और पंखे भी लाए हैं ताकि गर्मी में भी उन्हें परेशानी न हो।

समर्थन मूल्य और खरीदी की मांग पर अड़े किसान

हरदा किसान आंदोलन का मुख्य मुद्दा समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन फसलों की खरीदी है। किसानों की मांग है कि मूंग और मक्का जैसी फसलों को सरकार तय मूल्य पर खरीदे। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें सही दाम नहीं मिलता, तो उनकी मेहनत बेकार चली जाती है। लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन आमदनी उतनी नहीं बढ़ रही। यही कारण है कि इस बार किसान पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे हैं और अपनी बात मनवाने के लिए अनिश्चित धरने पर बैठ गए हैं।

हरदा किसान आंदोलन में कई जिलों के किसान शामिल

यह आंदोलन केवल हरदा जिले तक सीमित नहीं है। इसमें देवास, नर्मदापुरम और खंडवा जैसे आसपास के जिलों के किसान भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। हजारों की संख्या में ट्रैक्टर लेकर किसान जिला मुख्यालय तक पहुंचे हैं और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। किसान नेताओं का दावा है कि यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा किसान आंदोलन बनता जा रहा है।

कोर कमेटी करेगी फैसले, आंदोलन को मिलेगा दिशा

आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए किसानों ने बारह सदस्यीय कोर कमेटी बनाई है। यह समिति आंदोलन से जुड़े सभी बड़े फैसले लेगी। इसका मकसद यह है कि आंदोलन में कोई अव्यवस्था न फैले और सभी किसान एकजुट रहकर अपनी मांगों को आगे बढ़ाएं। कोर कमेटी के गठन से हरदा किसान आंदोलन को एक मजबूत दिशा मिलती नजर आ रही है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
Follow Us :GoogleNews