हरदा जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक बड़ा साधन बनती जा रही है। रबी फसल के बाद कई किसान मूंग की खेती करते हैं क्योंकि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है। लेकिन इस फसल की सफलता काफी हद तक समय पर मिलने वाली सिंचाई पर निर्भर करती है। इसी वजह से किसान इस समय तवा डैम से पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं।
हरदा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जल उपयोगिता समिति की बैठक में किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी। किसानों ने प्रस्ताव दिया कि 20 मार्च से तवा डैम से सिंचाई का पानी छोड़ा जाए, ताकि 23 मार्च तक नहरों के माध्यम से यह पानी खेतों तक पहुंच सके। इससे हजारों किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की सिंचाई में मदद मिल सकेगी।
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जल उपयोगिता समिति की बैठक में किसानों की मांग
हरदा कलेक्ट्रेट में हुई जल उपयोगिता समिति की बैठक में जिले के किसान प्रतिनिधियों के साथ सिंचाई विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में किसानों ने साफ तौर पर कहा कि मूंग की फसल का समय बहुत कम होता है और अगर शुरुआती समय में सिंचाई नहीं मिलती तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
किसानों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि तवा डैम से 20 मार्च से पानी छोड़ा जाए। उनका कहना है कि यदि पानी समय पर छोड़ा गया तो 23 मार्च तक हरदा जिले के नहर तंत्र में पानी पहुंच सकता है। इससे खेतों में सिंचाई शुरू हो सकेगी और मूंग की बुवाई सही समय पर हो पाएगी।
किसानों ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में जब तवा डैम से समय पर पानी छोड़ा गया था, तब जिले में मूंग की खेती का रकबा बढ़ा था और किसानों को अच्छी पैदावार भी मिली थी। यही कारण है कि इस साल भी किसान समय पर पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
38,460 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य
सिंचाई विभाग ने ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना के अनुसार कुल 38,460 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत हरदा जिले के कई गांवों के किसानों को नहरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
हरदा डिवीजन में 19,135 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं टिमरनी डिवीजन में 19,325 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाने की योजना बनाई गई है। इसका मतलब है कि जिले के बड़े हिस्से में मूंग की फसल को तवा डैम के पानी से सिंचाई मिल सकेगी।
गांवों की बात करें तो हरदा डिवीजन के 111 गांव और टिमरनी डिवीजन के 56 गांव इस योजना में शामिल हैं। इन गांवों के किसानों को नहरों के माध्यम से पानी मिलेगा। सिंचाई विभाग का कहना है कि यदि तय समय पर पानी छोड़ा जाता है तो हजारों किसानों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
मूंग की फसल के लिए सिंचाई क्यों जरूरी
ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के लिए सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण जरूरत होती है। गर्मी के मौसम में बारिश नहीं होती और जमीन में नमी भी कम हो जाती है। ऐसे में फसल की शुरुआत में पानी मिलना बेहद जरूरी होता है।
अगर बुवाई के बाद खेत में पर्याप्त पानी नहीं मिलता तो बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाते। कई बार पौधे कमजोर रह जाते हैं और उत्पादन भी कम हो जाता है। इसलिए किसान चाहते हैं कि नहरों में समय पर पानी पहुंचे।
तवा डैम से आने वाला पानी हरदा जिले के कई हिस्सों में खेती की लाइफलाइन माना जाता है। खासकर ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में यह पानी किसानों के लिए बहुत बड़ा सहारा बनता है। यही वजह है कि किसान इस समय पानी छोड़ने के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले वर्षों में मूंग की खेती से किसानों को फायदा
हरदा जिले में पिछले कुछ वर्षों में मूंग की खेती का क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। जब तवा डैम से समय पर पानी छोड़ा गया तो किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की। इसका असर किसानों की आय पर भी देखने को मिला।
मूंग की फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। कई किसानों ने बताया कि मूंग की खेती से उन्हें अतिरिक्त कमाई का मौका मिला है। यही वजह है कि जिले के किसान अब हर साल ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इसके अलावा मूंग एक दलहनी फसल है, जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहनी फसलों की खेती से जमीन की गुणवत्ता बेहतर होती है और अगली फसल के लिए मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है।
कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने किया नहर निर्माण कार्य का निरीक्षण
हरदा जिले के कलेक्टर सिद्धार्थ जैन भी किसानों की सिंचाई व्यवस्था को लेकर सक्रिय नजर आए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे नहर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कहा कि नहर निर्माण का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि किसानों को समय पर पानी मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि सिंचाई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन का कहना है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि खेती के मौसम में किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।