
हरियाणा में चुनावी मौसम गर्म होने लगा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर फर्जी वोटिंग के आरोपों का ताजमहल सा हमला बोला। सीएम ने साफ किया कि लोकतंत्र पर खतरा नहीं है, लेकिन कांग्रेस की राजनीति जरूर खतरे में है।
सीएम सैनी ने लगाया फर्जी वोटर बनाने का आरोप
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने हरियाणा में फर्जी वोटर बनाकर वोट चोरी की। उन्होंने पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के 2009 विधानसभा चुनाव के मामले का जिक्र करते हुए बताया कि कटारिया ने झूठे दस्तावेजों का उपयोग कर मतदाता सूची में फर्जी वोटर दर्ज किए। सीएम ने कहा कि यह सब लोग जानते हैं और अब समय आ गया है कि कांग्रेस अपने कार्यों की जवाबदेही दे। सैनी ने आरोपों को लेकर मीडिया में स्पष्ट बयान देते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मसला बताया।
कैथल और नूंह में फर्जी वोटिंग की जांच
सीएम ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नूंह और कुन्हाना में फर्जी मतदान के आरोपों की जानकारी दी। इस दौरान 78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, लेकिन इंक मार्किंग की जांच में कई मतदाताओं के निशान नहीं मिले। उन्होंने हाईकोर्ट में प्रस्तुत कैथल के फर्जी मतदाता मामले का भी जिक्र किया। पारस मित्तल ने हाईकोर्ट में 10 हजार फर्जी वोटर की सूची दी थी, जिसमें सात हजार से अधिक फर्जी वोटर पाए गए। सीएम ने कहा कि ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस का फर्जी वोट का खेल जारी रहा।
कांग्रेस की राजनीति खतरे में
सीएम सैनी ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस समय फर्जी वोटिंग हुई, उस समय प्रदेश में कौन सी सरकार थी। उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज ने रिपोर्ट वापस ले ली। सीएम ने कहा कि संविधान या लोकतंत्र खतरे में नहीं है, बल्कि कांग्रेस की राजनीति खतरे में है। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
राहुल गांधी पर निशाना और प्रेस वार्ता
चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान सैनी ने कहा कि राहुल गांधी की आदत झूठे और निराधार आरोप लगाने की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कर्मों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। सीएम ने स्पष्ट किया कि देश का लोकतंत्र सुरक्षित है और जनता को असलियत समझनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी को चेतावनी दी कि वे झूठ फैलाकर अपनी राजनीतिक छवि सुधारने की कोशिश न करें।
