
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान हरियाणा के कैथल जिले के गांव रोहेड़ा के लांस नायक नरेंद्र सिंधु शहीद हो गए। महज 28 साल की उम्र में उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इतनी कम उम्र में देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले नरेंद्र सिंधु कौन थे, यह जानकर हर कोई भावुक हो गया। वे अपने परिवार के लिए गर्व का विषय थे, लेकिन उनकी शहादत ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी। उनकी कहानी प्रेरणा और पीड़ा दोनों बन गई है।
सेना में भर्ती और करियर की शुरुआत
नरेंद्र सिंधु का जन्म 5 अक्टूबर 1996 को हरियाणा के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का सपना देखने वाले नरेंद्र ने 2017 में भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपनों को पूरा किया। सेना में शामिल होते ही उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से खुद को साबित किया। उनका सपना था कि वर्दी पहनकर मातृभूमि की सेवा करें। उनकी बहादुरी और देशप्रेम ने पूरे गांव को गौरवान्वित किया। लेकिन उनकी शहादत की खबर ने पूरे गांव को गहरे दुख में डुबो दिया, जहां हर किसी की आंखें नम थीं और गर्व भी साफ झलक रहा था।
परिवार की स्थिति और अधूरी रही जिंदगी
नरेंद्र सिंधु के घर में मातम छाया हुआ है। उनकी माँ रोशनी देवी सदमे में हैं और कैमरे के सामने एक शब्द तक नहीं बोल पाईं। पिता दलबीर सिंह की हालत भी बिगड़ गई है और डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। परिवार में दो बड़ी बहनें हैं जिनकी शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई अमेरिका में काम करता है। नरेंद्र की शादी अगले साल होने वाली थी, लेकिन अब घर की खुशियाँ मातम में बदल गई हैं। पूरा गांव उनके परिवार के साथ खड़ा है और उनकी शहादत पर गर्व और दुख दोनों महसूस कर रहा है।
चाचा और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
शहीद नरेंद्र सिंधु के चाचा बलबीर और चचेरे भाई विक्रम ने बताया कि सेना मुख्यालय से फोन कर परिवार को उनकी शहादत की जानकारी दी गई। मुठभेड़ में नरेंद्र ने आतंकियों से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की और दुश्मनों को मार गिराया। उनकी बहादुरी से गांव गर्वित है। हर आंख नम है, लेकिन लोग उनके बलिदान को सलाम कर रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि नरेंद्र हरियाणा की माटी के सच्चे वीर सपूत थे और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। पूरा प्रदेश उनके परिवार के साथ खड़ा है।
