किसान से मांगी 2 लाख की रिश्वत, लोकायुक्त ने SDM कार्यालय पर मारा छापा

किसान से मांगी 2 लाख की रिश्वत, लोकायुक्त ने SDM कार्यालय पर मारा छापा

सीहोर।
प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नही ले रहे है। आए दिन अधिकारी-कर्मचारी लोकायुक्त के शिकंजे में फंस रहे है। ताजा मामला सीहोर से सामने आया है जहां लोकायुक्त की टीम ने एसडीएम कार्यालय पर छापेमार कार्रवाई की।जब टीम के कार्यालय पहुंचने की खबर एसडीएम को लगी तो वे वहां पहुंचे ही नही।आरोप है कि एसडीएम ने किसान से दो लाख की रिश्वत की मांग की थी।कार्रवाई के बाद से एसडीएम फरार है।फिलहाल एसडीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज केस की जांच की जा रही है।

दरअसल,सीहोर के रेहटी के रहने वाले जितेंद्र गौर से एसडीएम वरुण अवस्थी ने नक्शा सुधार कर डायवर्जन के लिए 2 लाख रुपए की मांग की थी। जिसको लेकर 1 मार्च को जितेंद्र ने वर्धमान फेब्रिक्स कंपनी के नर्मदा गेस्ट हाउस के रूम नं 12 में जाकर एसडीएम को 50 हज़ार रुपए दिए थे। इसके बाद भी एसडीएम नही माना और उसने किसान को बाकी के डेढ़ लाख रुपए के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया था। इन सब से तंग आकर किसान ने भोपाल लोकायुक्त में इसकी शिकायत की और लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में रिश्वत मांगने के ऑडियो सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी।इसके बाद टीम ने योजना बनाकर जितेंद्र को डेढ़ लाख रुपए लेकर एसडीएम के कार्यालय भेजा। वही लोकायुक्त की भी टीम वहां पहुंचे लेकिन एसडीएम वरुण अवस्थी को इसकी भनक लग गई और वो बुदनी से बाहर कहीं चले गए।हालांकि टीम ने कार्यालय में छापामार कार्रवाई की। पुलिस इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज करवाया है। इस पूरी कार्रवाई के अंतर्गत लोक युक्त डीएसपी नवीन अवस्थी, निरीक्षक मुकेश तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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