आखिर क्यों दुखा सिंधिया का दिल

आखिर क्यों दुखा सिंधिया का दिल

भोपाल। लंबे अंतराल के बाद गुना आए कांग्रेस के स्टार प्रचारक नेता और गुना के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के दिल का गुबार आखिर आ ही गया। गुना में आज पत्रकारों से बात करते हुए सिंधिया बोले कि मैंने गुना का नक्शा बदलने की पूरी कोशिश की। मैं किसी को उंगली नहीं दिखा सकता ।लोकसभा चुनावों के परिणाम निराशाजनक नहीं बल्कि दिल दुखाने वाले थे। सिंधिया अपने इस दुख का इजहार पहले शिवपुरी मे भी कर चुके हैं।

दरअसल स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बाद लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया इस क्षेत्र से सांसद चुने जाते रहे हैं लेकिन वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था ।सिन्धिया का हारना उनसे ज्यादा पूरे देश के लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था। हालांकि इसके पीछे भी मोदी लहर को ही जिम्मेदार ठहराया गया। फिलहाल सिंधिया कांग्रेस में अपनी नई भूमिका की तलाश में है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा या फिर राज्यसभा के माध्यम से उन्हें संसद में भेजा जाएगा। उनके समर्थक भी लगातार कमलनाथ से की मांग कर रहे हैं कि पिछला विधानसभा चुनाव सिंधिया के नाम पर लड़ा गया और कांग्रेस ने 15 साल पुरानी बीजेपी की सरकार को उखाड़ कर फेंका उसमें सिंधिया का बहुत महत्वपूर्ण योगदान था इसलिए उन्हें भी कोई न कोई जिम्मेदारी दी जाए। लेकिन राजनीति की अपने गणित है और यह गणित कब साकार रूप में यह देखने वाली बात होगी

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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