रेल मंत्री के ट्वीट पर अमृता राय का तंज

रेल मंत्री के ट्वीट पर अमृता राय का तंज

ग्वालियर//अतुल सक्सेना । महिला दिवस से पहले रेल मंत्री द्वारा देश के रेलवे स्टेशनों पर काम करती महिलाओं के वायरल वीडियो और फोटो को गर्व की बात बताने पर वरिष्ठ पत्रकार एवं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि किसी की मजबूरी पर गर्व कैसे कर सकते हैं ये उसका मखौल उड़ाना है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित चार दिवसीय बिटिया उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आईं वरिष्ठ पत्रकार एवं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर खुलकर अपने विचार रखे।
अमृता राय ने सरकार की योजनाओं में महिलाओं के गलत चित्रण और प्रस्तुतीकरण पर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के प्रोग्राम चलाए जाते हैं। जिसमें लाड़ली लक्ष्मी योजना में बच्ची की पढ़ाई के साथ-साथ इस बात पर जोर दिया जाता है कि इस योजना के तहत जो राशि को मिलेगी वह उसे दहेज के रूप में काम आएगी । जबकि इस योजना में बच्ची की पढ़ाई और उसके पैरों पर खड़ा होने को प्रभावी तरीके से बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सरकार चलाने वालों से ये उम्मीद करते हैं कि वो समाज को एक नई दिशा दिखाएंगे लेकिन जब रेल मंत्री सिर पर बोझा ढोती और कुली का काम कर रही महिला के वीडियो पर ट्वीट करते हैं कि ये देश के लिए गर्व की बात है तो मुझे हैरानी होती हैनकि किसी की मजबूरी पर हम गर्व कैसे कर सकते हैं ये उसकी मजबूरी का मखौल उड़ाना है। यदि हमें उस सशक्त करना है तो उस दिखाने के और भी तरीके हैं। गौरतलब है कि रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में रेलवे में काम कर रहीं महिलाओं के फोटो वीडियो पर ट्वीट कर उनके काम को सराहा है और से गर्व कहा है। इन वीडियो और फोटो में महिलाएं पॉइंट्स मेन, कुली, सफाईकर्मी, टिकट विंडो क्लर्क, इंजन ड्रायवर, स्टेशन मैनेजर सहित सभी वो काम करती दिखाई दे रही हैं जो कभी पुरुष करते थे। महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ही रेल मंत्री ने महिला दिवस से पहले ट्वीट कर बधाई दी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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