अब सिंधिया के समर्थन में बीस हजार बाबाओं को उतारने का दावा

अब सिंधिया के समर्थन में बीस हजार बाबाओं को उतारने का दावा

परवेज खान/शिवपुरी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के सड़क पर उतरने के बयान पर चल रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन कोई न कोई नेता एक न एक ऐसी टिप्पणी कर देता है कि एक बार फिर आग में घी पड़ जाता है और कांग्रेस के भीतर समन्वय की बातें करने वालों की बातों पर पानी फिर जाता है।ताजा मामले मे शुक्रवार को शिवपुरी दौरे पर आए मिर्ची बाबा ने अब सिंधिया की बात को बिल्कुल जायज ठहराया है और कहा है कि वचन पत्र में दी गई हर बात को पूरा करना सरकार की जवाब देही है और सिंधिया ने ऐसा कोई गलत बयान नहीं दिया। अगर सिंधिया सड़क पर उतरते हैं तो उनके साथ पूरे देश के बीस हजार बाबाओं को लेकर मैं खुद सङक पर उतरूगा। मिर्ची बाबा यानि वैराग्यनंद वही बाबा है जो पहले भी विवादों में फंस चुके हैं। लोकसभा चुनाव में उन्होंने भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह की जीत का दावा किया था और कहा था कि यदि दिग्विजय नहीं जीते तो वह 16 जून को भोपाल के बड़े तालाब में जल समाधि ले लेंगे। हालांकि बाद में बाबा ने अपनी बात को पूरा नहीं किया और भाजपा ने बाबा का मजाक उड़ाते हुए उन्हें प्रतीकात्मक रूप से उनके पोस्टर को जल समाधि दिलाई थी। अब बाबा का यह बयान एक बार फिर सिंधिया के पक्ष में चल रही बयानबाजी को बढायेगा और  सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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