कोरोना को हराने में दिन-रात जुटा भोपाल का चिरायु अस्पताल

कोरोना को हराने में दिन-रात जुटा भोपाल का चिरायु अस्पताल

भोपाल।

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जहां भोपाल में भी तेजी के साथ मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, वही अच्छी बात यह भी है कि उन्हें बेहतर इलाज और मोटिवेशन के माध्यम से सही करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है ।इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ा रहा है भोपाल का चिरायु मेडिकल अस्पताल।

अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ अजय गोयनका 24 घंटे अभी कोरोना को हराने के मिशन में जुटे हैं।उनके साथ दो सौ से ज्यादा मेडिकल और पैरामेडिकल की टीम भी दिन-रात इसी काम में जुटी है ।घर परिवार से दूर यह पूरा का पूरा मेडिकल अस्पताल इस समय कोविड-19 डेडीकेटेड अस्पताल ।है इस अस्पताल में सभी तरह के इलाज होते थे लेकिन समाज के हित में डॉक्टर गोयनका ने इस समय इसे कोविड-19 मिशन को समर्पित कर दिया है।

डब्ल्यूएचओ, भारत सरकार और राज्य सरकार के पूरे पैरामीटर्स को पूरा करने के बाद इस अस्पताल में मरीजों को न केवल बेहतर सुविधाएं दी जा रही है बल्कि उसके साथ साथ उनके मनोरंजन के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। दो सौ से ज्यादा मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ में से 14 दिन पहले सौ और फिर दूसरे 14 दिन दूसरे सौ पैरामेडिकल स्टाफ रहते हैं और यह सभी भी क्वॉरेंटाइन में रहते हैं। डॉक्टर गोयनका का कहना है कि मानवता का तकाजा है कि अभी हर व्यक्ति खुद की सोचने के बजाय मानव मात्र के बारे में सोचें और कोरोना को हराना मानवता की बड़ी जीत होगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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