प्रदेश में प्रमोशन पर आरक्षण पर क्या बोले कमलनाथ

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भोपाल।उत्तराखंड राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आश्चर्यजनक और संविधान की मूल भावना के प्रतीक बताया है। दरअसल 7 फरवरी 2020 को मुकेश कुमार गर्ग vs उत्तराखंड राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि पदोन्नति में आरक्षण देना राज्य सरकारों के लिए जरूरी नहीं। कमलनाथ ने कहा है कि इस निर्णय से उत्तराखंड की भाजपा सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति को सीधी भर्ती और पदोन्नति में आरक्षण देने की बात और उसका दोमुहा चेहरा जनता के सामने उजागर हो गया है। कमलनाथ ने कहा है कि उत्तराखंड की सरकार ने इसके लिए जो विशेष समिति गठन की थी उस समिति की रिपोर्ट को भी दरकिनार कर दिया गया। जबकि समिति ने स्पष्ट कहा था कि राज्य में सरकारी सेवा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके बाद भी भाजपा सरकार ने न्यायालय में आरक्षण का विरोध किया ।सरकार की यह नीति दलित और आदिवासी वर्गों के हितों का विरोध है। कमलनाथ ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी ने संविधान की भावनाओं का सम्मान करते हुए अनुसूचित जाति और जनजाति को शासकीय सेवाओं और शैक्षिक संस्थाओं में आरक्षण देने का कानूनी प्रावधान किया था और पार्टी किसी भी सूरत में इन प्रावधानों को खत्म नहीं होने देगी। मध्य प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए पक्षधर है और माननीय न्यायालय के समक्ष राज्य सरकार अपना पक्ष मजबूती के साथ रहेगी।

Gaurav Sharma
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