”रामायण” को लेकर आपस में भिड़े दिग्गी-रामेश्वर, यूजर्स ने भी जमकर किया ट्रोल

”रामायण” को लेकर आपस में भिड़े दिग्गी-रामेश्वर, यूजर्स ने भी जमकर किया ट्रोल

भोपाल।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने एक ट्वीट को लेकर फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। रविवार सुबह अपने ट्विटर अकाउंट से पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए कहा की दूरदर्शन पर राजीव गांधी के अनुरोध पर रामायण सीरियल बनाया गया था। जिसके बाद से ट्विटर पर लोग उन्हें अब जमकर ट्रोल कर रहे हैं।

दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने अपने ट्वीट में कहा है कि राजीव गांधी जी के अनुरोध पर ही रामानंद सागर ने रामायण सीरियल बनाया था। आपकी केवल जानकारी के लिए।जिसके बाद उन्हें ट्रोल करते हुए बीजेपी विधायक रामेश्वर सिंह ने ट्वीट कर पूछा कि ‘किस के अनुरोध पर कोर्ट को बताया गया था कि राम रावण युद्ध कभी हुआ ही नहीं और प्रभु राम काल्पनिक है’। अन्य लोगों ने भी पूर्व मुख्यमंत्री के जमकर मजे लिए।Republic Of Fekoslovakia ने लिखा आप रामायण बन्द करवा के मानेंगे वहीं एक ट्रोलर ने लिखा “पर कांग्रेस तो श्री राम के अस्तित्व को मानती ही नहीं” तो वहीं एक ने कहा कि “जल्द ही किसी मंदिर में भजन-कीर्तन करते दिखाई देंगे। नरेंद्र मोदी नाम के एक यूजर ने लिखा कि सोनिया गांधी ने किस के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया कि श्री राम काल्पनिक है। तो वहीं बिट्टू बाजपेई ने लिखा कि नेहरू चाचा अपनी कलम से लिखे होंगे ना, जानकारी के लिए पूछ रहे हैं।

गौरतलब हो कि पूरे देश में 21 दिन के लॉक डाउन को देखते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने ट्वीट कर यह जानकारी दी थी की पब्लिक डिमांड पर रामायण का प्रसारण दूरदर्शन पर पुनः शुरू किया गया है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रही है। वहीं ट्विटर पर भी रामायण नंबर 1 पर ट्रेंड कर रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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