Lockdown 4.0: प्रदेश में खुल सकेंगे सैलून, करना होगा इन निर्देशों का पालन

Lockdown 4.0: प्रदेश में खुल सकेंगे सैलून, करना होगा इन निर्देशों का पालन

भोपाल।

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोरोना(corona) के मामले के बीच प्रदेश सरकार(state government) ने राज्य में सैलून(salon) खोलने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।  सरकार की तरफ से सख्त आदेश के साथ कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश का पालन करने वाले ही हेयर कटिंग सलून(hair cutting salon) खोल सकेंगे। प्रदेश सरकार ने सात बिंदुओं में हेयर कटिंग सैलून एवं पार्लर(parlour) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

दरअसल गुरुवार को दिशा निर्देश जारी करते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि बुखार, जुखाम, खांसी एवं गले में खराश वाले व्यक्तियों का सलून एवं पार्लर में प्रवेश निषेध होगा। वही सलून मैं जाने से पूर्व हैंड सैनिटाइजर प्रवेश द्वार पर उपलब्ध रहेंगे और उनका उपयोग किया जाएगा। राज्य शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी केस शिल्प एवं स्टाफ के लिए फेस मास्क, हेड कवर का उपयोग अनिवार्य होगा। वहीं प्रत्येक ग्रह के लिए अलग से डिस्पोजल या पेपर उपयोग में लाया जाएगा। राज्य शासन द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रत्येक हेयर कट के बाद स्टाफ को अपने हाथों को सैनिटाइज करना होगा। इसके साथ ही सभी कॉमन क्षेत्र, सीढ़ियों एवम् लाउंज की साफ सफाई अनिवार्य होगी।

बता दे कि लॉक डाउन के चौथे चरण में सरकार द्वारा संक्रमित क्षेत्रों को छोड़कर सभी जगह कुछ रियायत दे दी गई है। इस बीच सरकार की तरफ से हेयर कटिंग सलून एवं पार्लर के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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