कैबिनेट मंत्री बोले-”जिनके घर कांच के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते”

कैबिनेट मंत्री बोले-”जिनके घर कांच के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते”

भोपाल
कमलनाथ सरकार में जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने शिक्षकों की भर्ती को लेकर बड़ा बयान दिया है। शर्मा ने कहा कि 13 साल बाद मध्यप्रदेश में 22 हजार नव शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।वही आईफा अवार्डस को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर शर्ना ने कहा कि जिनके घर कांच के होते है वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं मारते है। इस अवार्ड्स के माध्यम से पूरी दुनिया भोपाल-इंदौर को जानेगी।आइफा के माध्यम से मप्र की ब्रांडिंग होगी। आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेगें।

मीडिया से चर्चा के दौरान शर्मा ने आगे कहा कि श्रीलंका में जिस तरह से मलेरिया समाप्त हुआ है वैसे भी मप्र से मलेरिया समाप्त होगा। सरकार – मिलिंडा फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करेगी।घडियाल और टाइगर स्टेट के बाद मध्यप्रदेश के फर्नीचर स्टेट बनाया जाएगा।इस पर जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि मप्र में वन क्षेत्र की अधिकता है, जिसका उपयोग किया जायेगा।ताकी मध्यप्रदेश को फर्नीचर स्टेट बनाया जा सके।

केन्द्र पर हमला
बजट में कटौती पर भी शर्मा ने केन्द्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। शर्मा ने कहा कि मप्र के हिस्से का 14 हजार 233 करोड़ रुपया केंद्र ने रोका। यह प्रदेश का दुर्भाग्य है। केंद्र सरकार कई योजनाओं के पैसे भी मप्र को नहीं दे रही है।मोदी सरकार को एनआरसी नहीं एनआरई लागू करना चाहिए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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