शिवराज का ट्वीट, सांसद भतीजे कल मैं सौंसर आ रहा हूं

शिवराज का ट्वीट, सांसद भतीजे कल मैं सौंसर आ रहा हूं

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ के सांसद बेटे नकुल नाथ के ट्वीट पर शिवराज सिंह चौहान को दिए गए भोजन निमंत्रण का जवाब शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट करके दिया है। शिवराज ने लिखा है कि भोजन के लिए आमंत्रित करना सौंसर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश और भारत की परंपरा नहीं है। सांसद भतीजे ,कल मैं सौंसर आ रहा हूं। हिंदवी स्वराज्य संस्थापक ,राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हमारे आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान यह देश किसी भी कीमत पर नहीं सह सकता। छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान के खिलाफ लड़ाई लड़ने मै आ रहा हूं। राजनीतिक रोटियां सेंकने का ना तो मेरा स्वभाव है और ना ही मेरा संस्कार है। पूरे प्रदेश को विनाश के गर्त में पहुंचाने वालों के मुंह से विकास के मॉडल की बात अच्छी नहीं लगती। लूट का नया मॉडल इस सरकार ने ही दिया है।

दरअसल आज सुबह ही सांसद नकुल नाथ ने ट्वीट करके शिवराज सिंह चौहान को भोजन के लिए शिकारपुर आमंत्रित किया था और कहा था कि आप मेरे साथ चल के छिंदवाड़ा का विकास मॉडल देखें।  जिसके जवाब में शिवराज का यह पलटवार आया है। शिवराज ने आगे यह भी लिखा है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिराकर अपमान करने वाले स्वयं के पैसे से उसे लगवाने की बात कर रहे हैं ? प्रतिमा गिरवाई ही क्यों ? सौंसर और छिंदवाड़ा की जनता में इतना सामर्थ्य है कि वह अपने पैसों से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगवा सकें और प्रतिमा तो जनता के पैसों से ही लगेगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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