वार्ड में सफाई नहीं होने से आक्रोशित महिलाओं ने कर दिया ये काम

वार्ड में सफाई नहीं होने से आक्रोशित महिलाओं ने कर दिया ये काम

मो.अंसार/कुक्षी। धार(dhar) के कुक्षी नगर परिषद के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 3 स्थित पड़वा क्षेत्र के रहवासी वार्ड में साफ सफाई एवं नालियों में पानी के निकासी नहीं होने के कारण पिछले कई महीनों से नगर परिषद के चक्कर काट काटकर परेशान हो गए हैं। आज वार्ड की कुछ महिलाएं घर के सामने पड़े कचरे को उठाकर नगर परिषद पहुंची जहां उन्होंने सीएमओ(CMO) कक्ष में उनकी टेबल पर कचरा फेंक दिया।

महिलाओं ने बताया हमारे वार्ड में ना ही साफ सफाई होती और ना ही नालियों से पानी निकासी होती है। वार्ड क्रमांक 3 के सचिन पाटीदार ने बताया पिछले कई महीनों से नगर परिषद कुक्षी सहित विभागों के चक्कर काट काट कर परेशान हो चुका हूं। मेरी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। वार्ड पार्षद के साथ नगर परिषद के मुख्य नगर पंचायत अधिकारी एवं नगर परिषद अध्यक्ष सहित वरिष्ठ अधिकारियों एवं सीएम हेल्पलाइन(CM Helpline) तक शिकायत कर चुका हूं लेकिन अब तक मेरी शिकायत का कोई निराकरण नहीं हुआ है वही प्रशासन द्वारा समस्या का निराकरण नहीं होने पर आत्मदाह करने को मजबूर हो रहा हूं। ऐसी बात भी युवक द्वारा बताई गई।

सचिन पाटीदार ने कहा वार्ड में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने मकानों का मटेरियल नालियों में जम गया है जिसके कारण नालियों से पानी निकासी भी बंद है, जमे हुए पानी के कारण वार्ड में मच्छरों का प्रकोप भी है जिसके कारण स्वास्थ्य पर प्रभाव दिखाई दे रहा है, आए दिन गंदगी के कारण बच्चे सहित परिवार के सदस्य बीमार हो रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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