हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में बन रहे बल्क ड्रग पार्क में 20 मेगावाट बिजली उत्पादन की तैयारी है। इसके लिए 300.28 करोड़ रुपये की लागत से भाप तैयार करने वाला बॉयलर स्थापित किया जाएगा। उद्योग विभाग ने इसके लिए टेंडर जारी किए थे, जिसकी प्री-बिड बैठक बुधवार को हुई। बैठक में कंपनियों की ओर से क्लॉज में बदलाव और अन्य आपत्तियों व सुझावों पर चर्चा की गई। यदि सरकार को लगता है कि सुझावों या क्लॉज में बदलाव जरूरी है, तो नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। अन्यथा विभाग सीधे टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड खोलेगा।
15 हजार करोड़ का निवेश संभावित
बल्क ड्रग पार्क के संचालन के लिए कुल 150 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें 20 मेगावाट बिजली बॉयलर से भाप के जरिए तैयार होगी, जबकि शेष 130 मेगावाट ग्रिड से प्राप्त की जाएगी। यह पार्क फार्मा उद्योगों के लिए कच्चा माल तैयार करने का केंद्र होगा, जिसके चलते बिजली की खपत काफी अधिक रहेगी। दिसंबर 2026 में पार्क के पहले चरण का कार्य शुरू होने की संभावना है। मैनकाइंड, अरबिंदो और सन फार्मा जैसी नामी दवा कंपनियां यहां उद्योग स्थापित करने के लिए सहमति दे चुकी हैं।
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इस पार्क में कुल 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश पार्क के भीतर और 5,000 करोड़ रुपये का निवेश बाहर के क्षेत्रों में किया जाएगा। बल्क ड्रग पार्क में देश-विदेश के प्रमुख औद्योगिक घरानों की भागीदारी होगी, जिससे हिमाचल प्रदेश फार्मा हब के रूप में और मजबूत होगा। निवेशकों के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा, बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार, बॉयलर से तैयार 20 मेगावाट बिजली के साथ-साथ पार्क में 35 से 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि बल्क ड्रग पार्क में निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश के औषधि उत्पादन क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी।