हिमाचल प्रदेश में पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में चंबा जिले की मेहला पंचायत की प्रधान राधा देवी को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी और विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। सितंबर में जारी आदेश में साफ लिखा गया है कि राधा देवी को सरकारी योजनाओं और नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया और पंचायत सचिव को कार्यभार सौंप दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, खंड विकास अधिकारी मेहला ने राधा देवी के खिलाफ जांच की थी। इसके बाद जिला पंचायत अधिकारी चंबा ने पुष्टि की कि अब राधा देवी प्रधान पद पर नहीं रहेंगी। आरोपों में कहा गया कि उन्होंने सरकारी धन का दुरुपयोग किया और योजनाओं के पैसे का गलत इस्तेमाल किया। इस पर 16 जुलाई को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और 12 अगस्त को उन्होंने अपना जवाब दाखिल किया। लेकिन उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया, जिसके बाद डीसी चंबा ने कार्रवाई करते हुए पद से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया।

मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी पर गिरी गाज

जांच रिपोर्ट के अनुसार, राधा देवी ने मनरेगा योजना के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्य के लिए सरोल स्थित एक हार्डवेयर दुकान से इंटरलॉक टाइलें खरीदीं और 42.48 लाख रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया। यह भुगतान नियमों के विरुद्ध था, क्योंकि कार्य पूर्ण होने से पहले भुगतान नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का मानना है कि राधा देवी के पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती थी और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती।

इस आधार पर जिला पंचायत अधिकारी तिलक राज ने उन्हें पंचायती राज अधिनियम 1994 (संशोधित) की धारा 145 (1) (ग) और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (सामान्य) नियम 1997 के नियम 142 (1) (क) के तहत पद से निलंबित कर दिया। अब पंचायत सचिव को कार्यों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि पंचायत स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता कितनी जरूरी है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंचे।