हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कंडक्टर भर्ती मामले में बाहरी उम्मीदवार की याचिका की खारिज

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की कंडक्टर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका हरियाणा निवासी एक महिला उम्मीदवार ने दायर की थी।
हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कंडक्टर भर्ती मामले में बाहरी उम्मीदवार की याचिका की खारिज

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की कंडक्टर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका हरियाणा निवासी एक महिला उम्मीदवार ने दायर की थी, जिसे भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट पात्रता मानदंड पूरे न करने के कारण अयोग्य घोषित किया गया था। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने नियम पढ़कर और समझकर ही आवेदन किया था और परीक्षा में भी हिस्सा लिया, तो बाद में वह भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकती।

हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों को विज्ञापन में लिखी गई शर्तों को ध्यान से पढ़ना और उनका पालन करना चाहिए। अगर कोई उम्मीदवार शर्तें पूरी किए बिना परीक्षा में शामिल होता है, तो चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी दलील स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में भाग लेने और असफल होने के बाद नियमों पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि में बताया गया कि एचआरटीसी ने कंडक्टर के 360 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें स्पष्ट था कि केवल वही उम्मीदवार पात्र होंगे जिन्होंने हिमाचल प्रदेश से 10वीं और 12वीं पास की हो या वे राज्य के निवासी हों। याचिकाकर्ता न तो हिमाचल की निवासी थीं और न ही राज्य से पढ़ाई की थी। इसके बावजूद उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया, परीक्षा भी दी और पास भी हो गईं। लेकिन दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान उन्हें अयोग्य ठहरा दिया गया। इस पर उन्होंने तर्क दिया कि भर्ती नियमों में ऐसी शर्त नहीं थी और उनकी उम्मीदवारी रद्द करना गलत है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने विज्ञापन में दर्ज शर्तों को जानने के बावजूद आवेदन किया था। ऑनलाइन आवेदनों की अधिक संख्या के कारण आयोग प्रारंभिक चरण में सभी को परीक्षा का मौका देता है, लेकिन अंतिम जांच दस्तावेज़ों से की जाती है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में शामिल होकर बाद में असफल होते हैं, उनकी याचिकाएं स्वीकार नहीं होतीं।

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